विसम्मति की टिप्पणी किसी मामले पर निर्णय लेने के लिए गठित समिति के सदस्यों में से किसी एक या एक से अधिक सदस्यों द्वारा उसके बहुमत के निर्णय के विरुद्ध लिखी गई टिप्पणी।
Note of protest
विरोध पत्र किसी अप्रिय, अनुचित अथवा अवैध कार्य के विरोध में लिखा गया शिकायती पत्र जिसमें उक्त गतिविधियों के प्रति आक्रोश प्रकट किया जाता है तथा भविष्य में ऐसा न किए जाने की चेतावनी भी दी जाती है;
No trust motion
अविश्वास प्रस्ताव दे. No confidence motion.
No war pact
युद्ध-वर्जन समझौता दे. Non aggression treaty.
Nuclear club
परमाणु क्लब दे. Atomic Club.
Nuclear deterrence
नाभिकीय भयावरोध नाभिकीय अस्त्रों की विनाशकारी शक्ति इतनी भयावह है कि किसी राज्य के पास नाभिकीय अस्त्र होने पर भी वह इनका प्रयोग इस भय के कारण नहीं कर सकता कि यदि आक्रांत राज्य ने भी प्रतिशोध में इसी प्रकार के अस्त्रों का प्रयोग किया तो दोनों का ही समूल विनाश हो जाएगा। इस प्रकार नाभिकीय अस्त्रों का होना ही राज्यों को एक-दूसरे के विरुद्ध इनका प्रयोग करने से रोकता है। इसी स्थिति को `नाभिकीय भयावरोध` कहते है।
Nuclear free zone
नाभिकीय अस्त्रमुक्त क्षेत्र संसार के वे क्षेत्र जहाँ राष्ट्रों की संधियों और समझौतों के अंतर्गत नाभिकीय अस्त्रों का स्थापन वर्जित कर दिया गया है जैसे, अंटार्कटिका, समुद्रतल और बाह्य अंतरिक्ष।
Nuclear umbrella
नाभिकीय छत नाभिकीय अस्त्रधारी राज्यों द्वारा उन राज्यों को संरक्षण देने का आश्वासन जिनके पास नाभिकीय अस्त्रशस्त्र नहीं हैं। यह इस शर्त पर दिया जाता है कि वे राज्य 1969 की परमाणु अस्त्र प्रसार-निरोधक संधि को स्वीकार करेंगे और तदनुसार अपने यहाँ नाभिकीय अस्त्रों का निर्माण नहीं करेंगे।
Nuclear winter
नाभिकीय शीत वैज्ञानिकों ने अनुमान लगाया है कि नाभिकीय बमों के प्रयोग से जो ध्रुआँ, गर्द और गैसें निकलेंगी, वे इतनी तीव्र तथा गहन होंगी कि सूर्य को पूर्णतया ढक लेंगी जिसके परिणामस्वरूप सूर्य की किरणों तथा सूर्य का ताप धरती तक नहीं पहुँच पाएगा और धरती ठंड से लगभग जम जाएगी। इस स्थिति को `नाभिकीय शीत` कहा गया है।
Nulla peona sine lege
विधि बिना दंड नहीं किसी व्यक्ति को विधि-सिद्ध अपराध के अभाव में दंड न देने का सिद्धांत। इस सिद्धांत के अनुसार अभियुक्त पर लगाए गए आरोपों का प्रचलित विधि द्वारा सिद्ध किया जाना आवश्यक होता है। यदि उसका अपराध उक्त प्रकार से सिद्ध नहीं होता तो उसे दंडित नहीं किया जा सकता। उसे केवल उतना ही दंड दिया जा सकता है जितना कि प्रचलित विधि द्वारा निर्धारित हो, उससे अधिक नहीं।