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Braj Bhasha Soor-Kosh (Vol-VI)

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निसिअर
चंद्रमा।
संज्ञा
[सं. निशाकर]

निसिचर
राक्षस।
उ.-जब देख्यौ दिव्यबान निसिचर कर तान्यौ। छाँड़थौ तब सूर हनू ब्रम्ह-तेज मान्यौ-९-९६।
संज्ञा
[सं. निशाकर]

निसिचरी
राक्षसी, निशाचरी।
उ.-तहँ इक अद्भुत देखि निसिचरी सुरसामुख-बिस्तार-९-७४।
संज्ञा
[सं. निशाचरी]

निसिचारी
राक्षस।
संज्ञा
[सं. निशाचारी]

निसिदिन
रात दिन, आठो पहर।
क्रि. वि.
[सं. निशिदिन]

निसिदिन
सदा-सर्वदा, नित्य।
क्रि. वि.
[सं. निशिदिन]

निसिनाथ, निसिनाह
चंद्र।
संज्ञा
[सं. निशानाथ]

निसि-निसि
आधी रात।
संज्ञा
[सं. निशि-निशि]

निसिपति
चंद्रमा।
बृष है लग्न, उच्च के निसिपति, तनहिं बहुत सुंख पैहैं-१०-८६।
संज्ञा
[सं. निशिपति]

निसिपाल
चंद्रमा।
संज्ञा
[सं. निशिपाल]


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