एक ही जाति में नर तथा मादा का पृथक्-पृथक् पाया जाना।
Diphyodont
द्विवारदंती
ऐसे स्तनियों के लिए प्रयुक्त, जिनमें पाती दांत (दूध के दांत) एक बार गिर कर फिर से नए स्थायी दंत निकलते हैं।
Diploblastic
द्विकोरकी
ऐसे प्राणियों के लिए प्रयुक्त, जिनमें दो आद्य भ्रूणीय स्तर-बाह्यचर्म (एक्टोडर्म) और अंतश्चर्म (एन्डोडर्म) होते हैं। इनमें स्तर-बाह्यचर्म (एक्टोडर्म) और अंतश्चर्म (एन्डोडर्म) होते हैं। इनमें वास्तविक मध्यजनस्तर नहीं होता; जैसे सीलेन्टेरेट प्राणी।
Diploid number
द्विगुणित संख्या, डिप्लॉइड संख्या
किसी जीव के युग्मक या नर तथा मादा जनन-कोशिकाओं में मौजूद गुणसूत्रों की दुगुनी संख्या का होना, जो किसी जीव-जाति का विशिष्ट लक्षण होता है। परिपक्व जनन कोशिकाओं को छोड़कर प्राणि-शरीर की सभी कोशिकाओं में गुणसूत्रों की द्विगुणित संख्या पाई जाती है; जैसे मानव में यह संख्या 46 है।
Diploid
द्विगुणित
जिसमें दैहिक कोशिकाओं में गुणसूत्रों की प्ररुपी संख्या जनन कोशिकाओं के गुणसूत्रों की संख्या से दुगुनी होती है। जैसे मानव दैहिक कोशिकाओं की यह संख्या 46 होती है।
Diploidy
द्विगुणिता
किसी प्राणी में कायिक कोशिकाओं के गुणसूत्रों की समान्य संख्या, जो युग्मकों अथवा जनन कोशिकाओं में पाई जाने वाली संख्या से दुगुनी होती है; जैसे मानव की कायिक कोशिकाओं में यह संख्या 46 और युग्मक में 23 होती है।
Diplotene(diplonema)
द्विपट्ट अवस्था (अवस्था)
अर्धगुणसुत्रण की प्रथम पूर्वावस्था में स्थूलपट्ट के ठीक बाद की अवस्था, जिसमें युग्मित गुणसूत्र अनुदैर्घ्यतः अर्धसूत्रों में विभाजित होते दिखाई देते हैं। इस अवस्था में सूत्रकेंद्रों के प्रतिकर्षण से दोनों अर्धसूत्रों के बीच की दूरी बढ़ती जाती है; किऐज़्मा बनने लगते हैं और जीन विनिमय की क्रिया भी होती है।
Diplura
डिप्ल्यूरा
अपंखी कीट, जिनके मुखांग अंतःसृत हनु (endognathus) वाले होते हैं। संयुक्त नेत्र और नेत्रक नहीं होते। उदर के अंत में युग्मित लूम होते हैं। अंतस्थ मध्य तंतुक (filament) नहीं होता। मैलपीगी नलिकाएं अवशेषांग के रुप में होती हैं अथवा नहीं भी होती। उदा.- केम्पोडिया और पेरीजेपिक्स जातियां।
Dipnoi
डिप्नोई
अलवणजलीय शल्कयुक्त मछलियों का समूह, जिनमें वाताशय फुप्फुस का काम करता है और जिनमें अस्थिल कंकाल, बाह्य तथा आंतर नासा-छिद्र और केंद्रीय अस्थिल अक्ष वाले युग्मित पख होते हैं। इन्हें फुप्फुसमीन भी कहते हैं और इनकी केवल तीन जातियां पाई जाती हैः निओसेरेटोइस ( आस्ट्रेलिया) लेपिडोसाइरेन (द. अमेरिका) और प्रोटोप्टेरस (मध्य अफ्रीका)।
Diptera
डिप्टेरा, द्विपंखी गण
एन्डोप्टेरीगोटा विभाग के कीटों का एक बड़ा गण, जिसमें अगले पंख झिल्लीदार तथा पिछले संतोलक के रुप में और मुखांग प्रधानतः चूषण प्रकार के होते हैं; जैसे मच्छर, मक्खी आदि।