वह बालक जिसकी बुद्धि, अभिवृत्ति, व्यक्तित्व अथवा व्यवहार सामान्य बालक से काफी भिन्न हो और उसके विकास के लिए विशिष्ट उपचार की आवश्यकता पड़े। इस शब्द को प्रायः उत्पाती, अत्यन्त शर्मीले या हठी बालक के लिए प्रयुक्त किया जाता है।
problem method
समस्या प्रणाली
वह प्रणाली जिसमें किसी समस्या को अधिगम के लिए एक उद्दीपन के रूप में प्रयुक्त किया जाता है। वह समस्या-छात्र को समाधान के लिए आवश्यक सामग्री ढ़ूढने, पूछताछ करने तथा समीक्षात्मक रूप से सोचने के लिए प्रेरित करती है। इस पद्धति का प्रयोग अध्यापक किसी कार्य में अकस्मात उत्पन्न हुई समस्या के रूप में कर सकता है, अथवा ऐसे पाठ्यक्रम आयोजित करके भी कर सकता है जिसमें कई समस्याएं निहित हों और जिनका समाधान अपेक्षित हो।
pro-chancellor
सम-कुलाधिपति
विश्वविद्यालय का वह अधिकारी जो उपकुलाधिपति की अनुपस्थिति में उसका प्रतिनिधित्व करता हो। यह पद कुलाधिपति और उपकुलाधिपति के बीच का होता है।
proctor
कुलानुशासक, प्रॉक्टर
विश्वविद्यालयों अथवा महाविद्यालयों का वह विशेष अधिकारी जो छात्रों में अनुशासन नियंत्रण करता है।
prodigy
असाधारण-प्रतिभाशाली, अद्भूत-प्रतिभाशाली
मानक स्तर से बहुत अधिक बुद्धि वाला बालक। प्रायः इस शब्द का प्रयोग विशेष गुण में अत्यधिक मात्रा रखने वाले बालक के लिए प्रयुक्त होता है।
professional course
वृत्ति पाठ्यक्रम, वृत्ति शिक्षण पाठ्यक्रम
कोई पाठ्यक्रम या पाठ्यक्रम-श्रृंखला जिसकी योजना शिक्षार्थी को किसी व्यवसाय या उसके किसी पक्ष विशेष के योग्य बनाने के उद्देश्य से की गई हो।
professional education
वृत्तिक शिक्षा
अ- व्यक्ति को किसी व्यवसाय के लिए तैयार करने के उद्देश्य से बनाये गये पाठ्यक्रमों की एक श्रृंखला। इन पाठ्यक्रमों की अवधि प्रायः 4 से 5 वर्ष की होती है परन्तु कुछ व्यवसायों में इसकी अवधि 1 से 2 वर्ष की भी होती है।
आ- अध्यापन व्यवसाय के लिए सम्पूर्ण उपक्रम जो एक व्यक्ति अध्यापन शिक्षा संस्था में प्राप्त करता है। इस शब्द का प्रयोग प्रायः आयुर्विज्ञान, विधि, अभियांत्रिकी, अध्यापन तथा अन्य अभिजात व्यवसायों के लिए होता है।
professor
आचार्य, प्रोफेसर
अ- शिक्षकों की विभिन्न श्रेणियों में उच्चतम श्रेणी।
आ- उच्च शिक्षा संस्था का अध्यापक।
programmed instruction
योजनाबद्ध अनुदेश
अधिगम की वह विधि जिसमें अध्यापन-मशीनों, पाठ्य पुस्तकों तथा विशेष प्रकार के पाठ्यक्रम की सहायता से छात्र स्वयं शिक्षा ग्रहण करता है। इस अनुदेश में शिक्षा सामग्री को आनुक्रमिक रूप से छोटे से छोटे भागों (फ्रेमों) में संगठित किया जाता है और हर भाग से संबंधित श्रेणीबद्ध प्रश्न क्रमानुसार व्यवस्थित होते हैं। छात्र एक प्रश्न का सही उत्तर देने के पाश्चात् ही दूसरे भाग की ओर अग्रसर होता है। सही उत्तर पाठ्य-पुस्तक में कहीं किसी अन्य पृष्ठ पर अथवा मशीन द्वारा प्राप्त होते हैं। इस विधि का प्रतिपादन बी. एफ. स्कीनर ने किया था।
programming
कार्यक्रमण, प्रोग्रामन
अ- अधिगम सामग्री का तार्किक, क्रमवार चरणों अथवा रूप-रेखा में निर्माण करना।
आ- किसी दत्त सामग्री पर अपेक्षित कार्यवाही के लिए अभिकलक तैयार करना, उदाहरणार्थ ब्लाँक डायग्राम बनाना, संकेत बनाना तथा यथार्थता के लिए प्रोग्राम की जांच करना।