द्वारण
वह पद्धति जिसके द्वारा संचगर्त में धातु का नियंत्रित प्रवाह बनाए रखा जाता है एवं अवांछित दृव्यों को संचगर्त में जाने से रोका जाता है। इसमें पूरक कुंडिका गलित धातु के भंडार का कार्य करती है जो पिंडन से होने वाले धातु के वाहक संकुचन की पूर्ति करती है। द्वारण के प्रमुख प्रकार ये हैं :--
अर्धस्थल द्वारण (Bottom gate)-- वाहक में चैनेल इस प्रकार लगा रहता है कि उसमें से गलित धातु साँचे की तली से प्रवेश करती है। इसका दोष यह है कि जैसे-जैसे धातु संच-छिद्रों से होकर साँचे के ऊपर धावक तक पहुँचती है वह ठंडी हो जाती है जो दैशिक पिंडन के अनुकूल नहीं है।
श्रृंग द्वारण (Horn gating)-- शुंडाकार सींग के आकार का चैनल जो वाहक की तली से आरंभ होता है। इसका उपयोग एक ही संच-बक्स में रखे कई साँचों को गलित धातु देने के लिए होता है।
आपृथकन रेखा द्वारण (Parting line gating)-- इस प्रकार का द्वारण साँचे के भागों के पृथकन पृष्ठ पर स्थित होता है। अपमलन गोलक (Skim bob) तथा चोक जैसी युक्तियों का प्रयोग करके धातुमल, धूल तथा बालू कणों को जाने से रोका जा सकता है।
सोपान द्वारण (Step gating) (Side gating)— एक दूसरे के ऊपर व्यवस्थित अनेक सीढ़ीनुमा द्वारों से साँचों को गलित धातु से भरने की व्यवस्था। वास्तव में यह व्यवस्था अधस्तल द्वार भरण के अनुरूप है, केवल उसमें अतिरिक्त पार्श्वद्वार होते हैं ताकि उसका उपयोग बुर्श संचकन के लिए हो सके। अधिक जटिल प्रकार के द्वारणों को प्रयोग करने का उद्देश्य यह है कि गर्म धातु का सुचारू प्रवाह प्राप्त हो सके।
शीर्ष-द्वारण (Top gating)-- शीर्ष द्वारण में पिघली हुई धातु द्रोणी से सीधी उड़ेली जाती है जो साँचे में ऊपर से प्रवेश करके नीचे की ओर प्रवाहित होती है। चूँकि सबसे गर्म धातु साँचे के ऊपरी भाग में प्रवेश करती है अतः वाहकों की दिशा में, दैशिक संपिंडन के लिए अनुकूल के लिए अनुकूल ताप-प्रवणता प्राप्त हो जाती है।
संभ्रामी द्वारण (Whirl gating)—इसमें द्वार अथवा स्प्रू इस प्रकार व्यवस्थित रहता है कि साँचे में धातु, स्पर्श रेखीयतः प्रविष्ट होती है जिससे चक्करदार गति उत्पन्न हो जाती है। अपकेंद्री बल के कारण धातुमल और ऑक्साइड, धातु से पृथक हो जाते हैं।
Gating ratio
द्वाण अनुपात
आनाल से होकर धातु के प्रवाह की दर, आनाल वाहकों तथा द्वारों के अनुप्रस्थ क्षेत्रफलों का फलन होती है। चूँकि आनाल का क्षेत्रफल सबसे अधिक होता है अतः इसका प्रवाह की दर पर सबसे अधिक प्रभाव पड़ता है। आनाल की निकास-दर सन्निकटतः निम्नलिखित व्यंजक द्वारा व्यक्त की जा सकती है।
W = K A√ᴴ
जबकि K आनाल रंध्र गुणांक, A न्यूनतम आनाल क्षेत्रफल तथा H आनाल की ऊँचाई है। इस प्रकार द्वारण अनुपात, आनाल क्षेत्रफल, वाहक क्षेत्रफल और द्वार के कुल क्षेत्रफल का अनुपात होता है। यह सुनिश्चित करना आवश्यक है कि द्वारण अनुपात इस प्रकार हो कि आनाल, धावक द्वार धातु से भरे रहे।
Gating system
द्वारण तंत्र
ढलाई--विज्ञान में इस शब्द का तात्पर्य उस पूरे तंत्र के डिजाइन और आकार से है जिससे होते हुए गलित धातु मुख्य संच-गुहिका में पहुँचने से पहले प्रवाहित होती है। द्वारण-तंत्र के प्रमुख घटक इस प्रकार है-- (1) निःस्रावी कुंडिका, (2) आनाल, (3)आनाल कुंड, (4) वाहक और (5) द्वार
German silver
जर्मन सिल्वर
तांबे और यशद की निकैल के साथ भिन्न-भिन्न अनुपातों में बनी मिश्रातुएँ, जैसे Cu 65%, Zn 17%, Ni 18% अथवा Cu 55%, Zn 27%, Ni 18% आदि। ये आघातवर्ध्य और तन्य होते हैं। इन पर वायु, ठंडे तनु अम्लों, क्षारों एवं समुद्र जल का कोई प्रभाव नहीं पड़ता है। प्रतिरोधी कुंडलियों, नकली चाँदी, समुद्री जहाज, रेलगाड़ी, मोटर एवं मकानों में सब प्रकार के फिटिंगों में तथा विद्युत लेपन के लिए आधार धातु के रूप में इनका उपयोग किया जाता है। इसे निकैल सिल्वर कहते हैं।
Gibbsite
गिब्साइट
जलयोजित ऐलुमिनियम ऑक्साइड Al₂O₃, 3HO यह क्रिस्टलीय होता है और अक्रिस्टलीय बॉक्साइट के साथ पाया जाता है। कठोरता 3, विशिष्ट गुरुत्व 2.35। इसे हाइड्रार्जिलाइट भी कहते हैं।
Gliding
गिल्डन
यांत्रिक अथवा रासायनिक विधि द्वारा सोने की परत चढ़ाना। यांत्रिक विधि में स्वर्ण-पत्र को किसी आसंजक, ऊष्मा अथवा पारे की सहायता से पृष्ठ पर चिपकाया, जाता है।
रासायनिक विधि में स्वर्ण क्लोराइड के ईथरी का धातु पर पेन्ट किया जाता है। फिर उसे गरम कर पॉलिश किया जाता है। यदि स्वर्ण-अमलगम का प्रयोग करना हो तो अमलगम प्रयुक्त करने से पहले धातु-पृष्ठ का, पारे मर्क्यूरिक-क्लोराइड के साथ उपचार किया जाता है। तत्पश्चात् पारे का वाष्पन कर पृष्ठ को उद्भ्राजित (Burnished) किया जाता है।
चीनी मिट्टी के बर्तनों का गिल्डन करने के लिए बबूल के गोंद में स्वर्ण-क्लोराइड, बिस्मथ ऑक्साइड और बौरेक्स के मिश्रण का प्रयोग किया जाता है।
निमज्जन द्वारा गिल्डन करने के लिए वस्तु को साफ कर उसे स्वर्ण क्लोराइड और पोटेशियम बाइकार्बोनेट के मिश्रण में डुबाया जाता है।
इन विधियों का स्थान अब विद्युत-निक्षेपण ने ले लिया है।
Gilding metal
गिल्डन धातु
एक ताम्र मिश्रातु जिसमें 5--10% यशद होता है। यह अत्यंत आघातवर्ध्य होता है और इसे बेल्लित कर पर्णी बनाई जा सकती है। इसका उपयोग विलेपन के लिए तथा पर्णी के रूप में किया जाता है।
देखिए-- Brass भी
Glazing
ग्लेजन, काचन
1. लोहे और इस्पात पर पॉलिश करना। इसमें तीव्र घूर्णी एमरी गोले का प्रयोग किया जाता है जिसके अपघर्षक गुणधर्म न्यूनतम कर दिए गए हैं।
2. परिष्करण से पहले कर्तक ब्लेडों को घिसना।
3. अपघर्षक पहिए के कर्तक-कणों को मंद करना।
4. उच्चतपासह पदार्थ के पृष्ठ पर कुछ अवयवों का संगलन जिससे काचाम लेप बन जाता है।
Gold bronze
स्वर्ण कांस्य
एक ताम्र मिश्रातु जिसमें 3--5% ऐलुमिनियम होता है। यह मजबूत और सुंदर रंग का होता है। इसका उपयोग सजावटी वस्तुओं और वास्तुशिल्पीय घटकों को बनाने में होता है।
Goldschmidt process
गोल्डश्मिट प्रक्रम
देखिए-- Metallothermic process के अंतर्गत Aluminothermic process