आधुनिक प्रौद्योगिकी के ज्ञान और कौशल प्रदान करने की शिक्षा। भारत में ऐसी शिक्षा देने के लिए कई प्रकार की संस्थाएं हैं जैसे औद्योगिक प्रशिक्षण संस्थान, जूनियर टैक्नीकल स्कूल, पौलिटैकनीक, इंजीनियरी महाविद्यालय और आई आई टी आदि।
Temporary certificate
अस्थायी प्रमाणपत्र
अध्यापन से संबंधित सभी न्यूनतम मानक प्राप्त कर लेने पर अध्यापक को दिए जानेवाले स्थानीय अध्यापन अनुमति पत्र जिसे अध्यापक द्वारा अतिरिक्त अर्हताएं जैसे स्नातक डिग्री अथवा अध्यापन अनुभव प्राप्त होने पर स्थायी मान लिया जाता है।
Ten+two+three pattern 10+2+3 scheme
दस+दो+तीन शिक्षा पद्धति
शिक्षा की एक ऐसी प्रणाली जिसमें दस वर्ष की विद्यालयी शिक्षा, दो वर्ष की उच्चतर माध्यमिक शिक्षा तथा तीन वर्ष की स्नातक शिक्षा सम्मिलित की जाती है। यह प्रतिरूप भारतीय शिक्षा आयोग, 1966 की सिफारिश पर आधारित है जिसे भारत सरकार के शिक्षा नीति के प्रस्ताव ने मान्यता प्रदान की है।
Terminal behaviour
अंत्य निष्पादन
विशिष्ट शिक्षण कार्यक्रम के अंत में विद्यार्थी से अपेक्षित सम्प्राप्ति।
Test bank
परीक्षण बैंक
विद्यार्थी की संज्ञानात्मक, अभिवृत्यात्मक तथा वैयक्तिक प्राप्तियों का मूल्यांकन करनेवाली सामग्री से संबंधित निकष परीक्षणों का संग्रह।
Test ceiling
परीक्षणगम्य उच्चतम सामर्थ्य
किसी परीक्षण द्वारा मापी जानेवाली व्यक्ति की योग्यता का उच्चतम स्तर।
Test-study method
परीक्षण अध्ययन प्रणाली
अध्यापन की एक कार्यप्रणाली जिसमें अध्ययन की एक इकाई के पश्चात छात्र को अध्ययन सामग्री से संबंधित परीक्षण दिया जाता है। इस परीक्षण से तत्काल ही यह पता चलता है कि छात्र ने अध्ययन विषय से संबंधित कितना ज्ञान प्राप्त किया है तथा उसे पुनः शिक्षण की आवश्यकता तो नहीं है।
Text book committee
पाठ्य पुस्तक समिति
किसी राज्य, जिला अथवा नगरपालिका द्वारा नियुक्त निर्वाचित अथवा चयन की गई एक समिति जिसका उत्तरदायित्व एक दिए हुए क्षेत्र के विद्यालयों के निर्धारित पाठ्यक्रमों के लिए पाठ्यपुस्तकों का चयन करना है।
Theory course
सिद्धांत पाठ्यक्रम
शिक्षा शास्र के विभिन्न पक्षों से संबंधित विविध पाठ्यक्रम जो शिक्षाशास्र के विद्यार्थियों के शास्रीय ज्ञान को समृद्ध और व्यापक बनाता है जैसे शिक्षा का इतिहास, शिक्षा का दर्शन, शिक्षा मनोविज्ञान आदि। यह व्यवहारात्मक पाठ्यक्रम जैसे अभ्यास शिक्षण से भिन्न है।
Theory of unfoldment
प्रस्फुटनवाद
एक प्राक्कल्पना जिसके अनुसार व्यक्ति नैसर्गिक रूप से स्वतंत्र, स्वायत्त, प्रगतिशील तथा सक्रिय होते हैं। उनका प्रत्येक कृत अच्छा ही होता है जब तक कि उन पर कोई बाह्य दूषित प्रभाव नहीं पड़ता। वे अपने जीवन के स्वयं निर्माता होते हैं।