फोर्ज वेल्डिंग
एक वेल्डिंग प्रक्रम जिसमें धातु के टुकड़ों को भट्टी में फोर्जन परास तक गरमकर और घन से पीटकर जोड़ा जाता है। ऐलुमिनियम मिश्रातुओं के लिए यह परास 400° --550°, ताम्र मिश्रातुओं के लिए 700-950° तथा सामान्य इस्पात के लिए 1000°--1250° होता है। इसे घन वेल्डिंग और बेलन वेल्डिंग भी कहते हैं।
Forging
फोर्जन
संपीडक बल द्वारा सामान्यतया गरम धातु का सुंघट्य विरूपण कर उसे वांछित आकार का बनाना। इसमें कभी-कभी रूपदाओं का प्रयोग भी किया जाता है।
फोर्जन प्रक्रमों का वर्गीकरण (1) प्रयुक्त मशीन के आधार पर (2) प्रयुक्त रूपदा के आधार पर किया जाता है। प्रयुक्त मशीन के आधार पर किया गया फोर्जन दो प्रकार का होता है (क) घन फोर्जन (ख) दाब फोर्जन प्रयुक्त रूपदाओं के आधार पर किया गया फोर्जन भी यह दो प्रकार का होता है (क) विवृत रूपदा फोर्जन (ख) संवृत रूपदा फोर्जन।
Forging defect
फोर्जन दोष
फोर्जन के कारण उत्पन्न दोष। ये तीन प्रकार के होते हैं।
1. पत्रक (Flakes)-- फोर्जनों की सतह पर बनने वाली परतें जो अत्यधिक फोर्जन-ताप एवं सतह के ऑक्सीकरण के कारण बनती है।
2. प्रवाह रेखा (Flow line)-- तप्त कर्म इस्पात में रेशेदार संरचना का बनना जो संघटन में भिन्नता अंतर्विष्टों की उपस्थिति के कारण उत्पन्न होती है। अनेक मुद्रांकित भागों में प्रवाह रेखाओं का विशेष महत्व है क्योंकि रेशेदार संरचना से दैशिक गुणधर्म उत्पन्न होते हैं।
3. आंतरिक दरार (Internal cracks)-- इस्पात फोर्जनों के अंदर प्रत्येक दिशा में पाई जाने वाली बारीक दरारें। ये बहुधा मिश्रातु इस्पातों के बड़े फोर्जनों में पाई जाती हैं किंतु कभी-कभी कार्बन इस्पातों में भी पाई जाती हैं। ये इस्पात में हाइड्रोजन की उपस्थिति के कारण उत्पन्न होती है।
Formed coke
अभिरूपित कोक
उपयुक्त बंधक का उपयोग कर कोयले अथवा आदग्ध कोयला-चूर्ण से बना रूपित अथवा संचित प्रकार या संपिंड। इस क्रिया में कभी-कभी दाब का प्रयोग भी किया जाता है। अभिरूपित कोक बनाने की कच्ची सामग्री लिग्नाइट से ऐन्थ्रासाइट तक कुछ भी हो सकती है।
Forming
अभिरूपण
1. किसी धातु के बने पुर्जे की मोटाई में कोई परिवर्तन किए बिना, उसके आकार अथवा आकृति में परिवर्तन करना। अपरूपण और ब्लैंकन भी इसके अपवाद हैं।
2. नलिका-निर्माण में इस शब्द का अर्थ है किसी पट्टी को रूपित बेलनों से प्रवेश कर, नलिकाकार रूप देने का प्रक्रम।
Founding
ढालना
धातुओं को पिघलाकार साँचों में वांछित आकार देना।
Foundary
संचकनी
ढलाई शाला जहाँ धातुओं और मिश्रातुओं को गलाकर और बालू या धातु के साँचों में जमा कर वांछित आकार में ढाला जाता है। पैटर्न बनाना, साँचे तैयार करना, गलाना, संचकों की सफाई और निरीक्षण आदि कार्य भी ढलाई शाला में सम्पन्न किए जाते हैं।
Foundry type metal
ढलाई टाइप धातु
कम गलनांक वाले सीस मिश्रातु जिसमें 54-70% सीसा, 10-20% वंग, 20-28% ऐन्टिमनी तथा अल्प मात्रा में तांबा होता है। यह पर्याप्त कठोर होता है तथा इसका उपयोग मुद्रण टाइप धातु के रूप में किया जाता है।
Fractional crystallisation
प्रभाजी क्रिस्टलन
घुले पदार्थों के मिश्रण से भिन्न विलेयता के आधार पर उसके घटकों को क्रिस्टलों के रूप में पृथक करना।
Fractional distillation
प्रभाजी आसवन
भिन्न क्वथनांक के द्रवों को भिन्न तापों पर आसवन द्वारा पृथक करना। इसके लिए प्रभाजी स्तंभ की सहायता ली जाती है।