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Shiksha Paribhasha Kosh Part-2 (English-Hindi)
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Self actualization
आत्मप्रत्यक्षीकरण
गैसलो द्वारा प्रतिपादित एक संप्रत्यय जिसे वह मानव आवश्यकताओं के आधार पर आधारित व्यक्तित्व विकास का एक महत्वपूर्ण चरण मानता है। इस स्थिति को प्राप्त कर लेनेवाला व्यक्ति यथार्थ के कुशल प्रत्यक्षण तथा स्वयं को, अन्य व्यक्तियों को और प्रकृति को स्वीकार करने में सक्षम हो जाता है। इस वर्ग के अंतर्गत आनेवाले व्यक्तियों के व्यवहार में स्वतःस्फूर्त स्पष्टवादिता अंतर्निहित होती है। उनका व्यक्तित्व आत्म केंद्रित न होकर परहित उन्मुख होता है।

Self corrective hand writing chart
स्वयं सुधारक हस्तलेखन चार्ट
ह्स्तलेखन की त्रुटियों को पहचानने, उन्हें दूर करने के लिए मार्गदर्शन दिए जाने की व्यक्तिगत अनुदेश की एक युक्ति। इसमें प्रत्येक प्रकार की त्रुटि को दूर करने के लिए विशेष अभ्यास कराया जाता है।

Self instructional device
स्व-शिक्षण युक्ति
एक यांत्रिक अथवा लेखाबद्ध युक्ति जिसमें सीखी जाने वाली सामग्री को एक सुनियोजित क्रमबद्ध विन्यास में प्रस्तुत किया जाता है। अध्यापक की सहायता के बिना शिक्षार्थी सामग्री का अध्ययन करता है और अपनी ही गति से आगे बढता है।

Self instructional module
स्व-शिक्षण माड्यल
अध्ययन की एक युक्ति जिसमें अध्ययन सामग्री को विशिष्ट इकाइयों में विभाजित किया जाता है और एक इकाई पर पूर्ण प्रवीणता प्राप्त कर लेने पर ही शिक्षार्थी आगे बढ़ सकता है। इस युक्ति में अध्यापन की अपेक्षा अधिक उद्यम की अपेक्षा की जाती है।

Self understanding
आत्मबोध
केस कार्य से संबद्ध एक प्रक्रिया जिसमें सेवार्थी को अपने विचार तथा भावनाओं की अभिव्यक्ति के लिए प्रोत्साहन मात्र विरेचन हेतु ही नहीं दिया जाता बल्कि उसे अपना मूल्यांकन करने तथा अपने आप को अधिक अच्छी तरह समझने का अवसर भी प्राप्त होता है।

Senescence
जरत्व
वृद्धावस्था में शारीरिक तथा मानसिक योग्यताएं क्षीण होने के कारण व्यक्ति के कार्यों, कौशलों तथा संरचना में हह्लास की प्रक्रिया।

Sensory memory
संवेदनात्मक स्मृति
स्मृति प्रक्रिया में प्राप्क्कल्पित पहली अवस्था जिसमें संवेदी उद्दीपन का अनुभव होने के पश्चात केवल कुछ क्षणों तक उसका प्रभाव बना रहता है। इस सामग्री का कुछ भाग लघुकालीन स्मृति में रूपांतरित हो जाता है और अधिकांश भाग लोप हो जाता है।

Sensory motor phase
संवेदन गतिक चरण
पियाजे द्वारा प्रतिपादित संज्ञानात्मक विकास की प्रारंभिक अवस्था। (सामान्यतः जन्म से दो वर्ष तक की अवस्था) यह क्रियाभिमुख अवस्था है जिसमें शिशु स्वलीनता से अहंकेद्रिकता की ओर अग्रसर होता है। इस चरण में निम्नलिखित अवस्थाएं सम्मिलित हैं - 1. यादृच्छिक तथा प्रतिवर्त क्रिया - जन्म से एक माह तक, 2. प्राथमिक वर्तुल प्रतिक्रियाऐं तथा पहली अन्विति योजनाएं - एक माह से चार माह तक, 3. द्वितीयक वर्तुल प्रतिक्रियायों की अवस्था - चार से आठ माह तक, 4. द्वितीयक अन्विति योजनाओं के समन्वय की अवस्था तथा उनका नई परिस्थितियों में अनुपयोग - आठ से बारह माह तक, 5. वांछित उद्देश्यों की प्राप्ति के नए साधनों के सक्रिय प्रयोग तथा अन्वेषण सहित तृतीय वर्तुल प्रतिक्रियाओं की अवस्था - बारह से अठारह माह तक, तथा 6. क्रियाओं के स्थान पर मानसिक संयोजन द्वारा नए साधनों के अन्वेषण की अवस्था अर्थात् प्रारंभिक स्मृति तथा आयोजना का प्रकट होना - अठारह से चौबीस माह तक।

Sequence effect
अनुक्रम प्रभाव
किसी प्रयोग में समान विषय अथवा विषयों के समूह को दिए जानेवाले निरूपणों के क्रम का प्रभाव।

Seven point plan
साप्र बिंदु योजना
किसी व्यक्ति की उपयुक्त व्यावसायिक पसंद को निर्धारित करने के लिए रोज़र ने यह सुझाव दिया है कि उस व्यक्ति के बारे में निम्नलिखित सात पक्षों में जानकारी एकत्रित की जाए, यथा 1. शारीरिक गठन, 2. उपलब्धियां, 3. सामान्य बुद्धि, 4. विशेष अभिक्षमता, 5. रूचियाँ, 6. शील स्वभाव, तथा 7. परिस्थितियॉ।


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