दृष्टिपटल की विद्युत् शक्यता मे होने वाले परिवर्तनों का ग्राफीय अभिलेख।
Electroshock therapy
विद्युत् आघात चिकित्सा
मस्तिष्क में विद्युत् धारा प्रवाहित कर आक्षेपी आघात उत्पन्न करके मनोविकारों का उपचार करने की एक प्रसिद्ध चिकित्सा पद्धति।
Electrostimulator
विद्युदुद्दीपक
शरीर को आघात का उद्दीपन देने के लिए उसमें विद्युत् धारा प्रवाहित कराने वाला एक विशेष उपकरण।
Electrotaxis
विद्युत् अनुचलन
विद्युत्-उद्दीपन के प्रति की जानेवाली साधारण अनुकूल या प्रतिकूल अनुक्रियाएं।
Electrotonus
विद्युत्तान
शरीर की किसी तंत्रिका में विद्युत्तधारा प्रवाहित करने से उसके ऊतकों में तत्काल ध्रुवीकरण होने से उस तंत्रिका की प्राकृत दशा में होने वाला परिवर्तन।
Emergency situation
आपातकालीन स्थिति
प्राय: अप्रायिक घटना जो कि स्वरूप में बदल सकती हो, अनियोजित हो तथा जिसमें त्वरित अनुक्रिया अपेक्षित हो।
Emergency theory (of emotions)
(संवेगों का) आपात सिद्धांत
सांवेगिक प्रक्रिया की व्याख्या के लिए कैनन द्वारा प्रस्तुत एक सिद्धांत जिसके अनुसार संवेग कालीन शारीरिक दशाएं संवेगानुभूति की पूर्ववर्ती न होकर सहवर्ती होती हैं जो व्यक्ति को संवेगावस्था में किसी भी आपात स्थिति का सामना करने के लिए तैयार रखती हैं। संवेगजनक बाह्य उद्दीपन का प्रत्यक्षण होते ही मस्तिष्क के निम्न केंद्रों, विशेषत: अधश्चेतक, की तंत्रिका कोशिकाओं की क्रिया बाधित होकर दो दिशाओं में सक्रिय हो जाती है-एक ओर तो वल्कुट क्षेत्र में जहां उक्त केंद्रों की क्रिया का संवेग के रूप में अनुभव होता और दूसरी ओर पेशियों आदि शारीरिक संरचनाओ में जहां अधश्चेतक के उत्तेजनकारी अनुकंपी तंत्रि-केंद्र की अतिक्रियाशीलता अत्यधिक ऊर्जा के संचार के साथ ही प्रावरोधी परानुकंपी केंद्र की प्रक्रियाओं को मंद करके हमें तत्काल अनुभूत संवेग के अनुरूप कोई आपात कार्य करने के लिए उतावला बना देती है।
Emergent norm theory
उद्गामी मानक सिद्धांत
सामूहिक व्यवहार जो कि उन मानकों द्वारा संचालित होते हैं, जिनका आधार वह विशिष्ट व्यवहार हैं जो आरंभ में मानकरहित भीड़ से उत्पन्न होते हैं।
Emergent property
उद्भूत गुण
भौतिकवाद की एक व्याख्या के अनुसार मन मात्र मस्तिष्क नहीं है क्योंकि मानसिक स्थितियाँ मस्तिष्कीय स्थितियों से उद्भूत गुण हैं।
Emotion
संवेग
किसी अवसर या परिस्थिति विशेष में किन्ही बाह्य या आंतरिक उद्दीपनों से उत्पन्न और किसी न किसी रूप में अनुभव करने योग्य अनुभूति और भाव की वे जटिल अवस्थाएं जिन की गतिपरक और चेष्टात्मक अभिव्यक्ति व्यक्ति में विभिन्न आंतरिक शारीरिक परिवर्तनों के रूप में होती है जिससे वह कुछ करने के लिए उत्तेजित और अभिप्रेरित होता है।