स्तंभ के मूल्यों से स्तंभ के माध्यों के बीच विचरण ज्ञात करने की विधि।
इसको निकालने की विधि यह है कि प्रत्येक स्तंभ में दिए गए अंक और उस कालम के माध्य के बीच के अंतर को लिया जाता है और फिर इस अंतर का वर्ग निकाला जाता है। तत्पश्चात् उस सारे स्तंभ के वर्गीकृत अंतरों को जोड़ लिया जाता है। यह प्रक्रिया बारी-बारी से सभी स्तंभों के लिए की जाती है और फिर सभी स्तंभों का अलग से जोड़ निकाला जाता है।
इसका सूत्र नीचे दिया है —
∑_1^kc▒∑_1^nc▒〖〖(x-xc)〗^2 ]〗
Vector
सदिश
ऐसी रेखा जो एक समतल में बिन्दु P को एक नियत मूल के साथ मिलाती है सदिश कहलाती है।
इसका मूलबिन्दु तथा दिशा निश्चित होती है।
Vector space
सदिश समष्टि
किसी आव्यूह के स्तंभों द्वारा जनित समष्टि।
सदिश समष्टि की संकल्पना का उपयोग आव्यूह कोटि की परिभाषा करने में किया जाता है और आव्यूह को सामान्यतः पंक्तियों और स्तंभों की आकृति के रूप में दिखाया जाता है।
यदि हम आव्यूह को M(X) द्वारा दिखायें, जिसे हम समष्टि का परिसर भी कहते है, तब हम किसी समष्टि Em में Z सदिशों की उपसमष्टि को XZ=O द्वारा दिखा सकते हैं।
उपर्युक्त XZ=O को शून्य समष्टि कहा जाता है तथा इसे N(X) द्वारा लिखा जाता है।
Vetal event
जैव घटना
इसमें जीवित-जन्म, मृत्यु भ्रूण-मृत्यु, विवाह, तलाक, दत्तक-ग्रहण, विधि-सम्मतन, विधिमान्यता देना, विवाहोच्छेदन अथवा कानुनी पृथक्करण आदि जीवन संबंधी अनेक विशिष्ट घटनाएं सम्मिलित हैं।
इनमें जन्म तथा मृत्यु को विशेष महत्वपूर्ण माना जाता है।
Vital rates
जैव दर
ये जैव घटनाओं जैसे जन्म, मृत्यु, भ्रूण-मृत्यु, विवाह, तलाक, दत्तक-ग्रहण आदि की प्रति सहस्र व्यक्तियों की बारंबारता होती है।
इसकी सूचना, रजिस्ट्रेशन-विधि, आवधिक सर्वेक्षण-विधि, या संगणना-विधि द्वारा तैयार जाती है।
जैव-दरों के परिकलन में आयु बंटन का विशेष महत्व होता है।
Vital registration
जन्म-मरण पंजीकरण
दे∘ — (Vital rates)
Vital statistics
जन्म-मरण संबंधी आँकड़े
दे∘ — (Vital rates)
Ven Neumann model
वॉन न्यूमैन मॉडल
वॉन न्यूमैन द्वारा बहुक्षेत्रक संवृद्धि के लिए तैयार किया गया मॉडल।
यह मॉडल विस्तार सिद्धांत के विश्लेषण के लिए मानक उपकरण माना जाता है।
इस मॉडल की शुरूआत अनेक निर्गतों और उत्पादन प्रक्रियाओं से होती है। n क्षेत्रकों में से प्रत्येक में पिछली अवधि में अपने द्वारा तथा दूसरे क्षेत्रकों द्वारा तैयार की गई निर्गतों का आगत के रूप में प्रयोग किया जाता है।
इस मॉडल का उद्देश्य अर्थव्यवस्था में स्थिर दर पर संतुलित संवृद्धि की संभावनाओं का पता लगाना होता है। इसकी रूप-रेखा यों दी जा सकती है:—
मानलीजिए—
i- अर्थव्यवस्था में चलने वाली किसी प्रक्रिया के स्तर की इकाई है तथा यह वस्तु j की aij मात्रा का आगत के रूप में प्रयोग करती है। इसकी j वस्तु की अपनी उत्पादन की मात्रा या निर्गत bij के बराबर है और यदि अर्थव्यवस्था द्वारा प्रक्रिया i की xi इकाईयों का प्रयोग किया जाता है तब इस मॉडल के अनुसार सभी प्रक्रियाओं द्वारा वस्तु j का आगत के रूप में कुल प्रयोग यों होगा:— ∑_(i=1)^m▒〖x^i a_ij 〗
और कुल निर्यात यों होगा
∑_(i=1)^m▒〖x_i b_ij 〗
Von Neumauns ratio
वॉन न्यूमैन अनुपात
इस अनुपात में किसी श्रेणी के प्रसरण और उसके वर्ग माध्य के उत्तरोत्तर अन्तर को एक प्रतिदर्शज के रूप में दिया जाता है। इस अनुपात की सहायता से किसी क्रमित श्रेणी में किए जाने वाले निरन्तर प्रेक्षणों की स्वतंत्रता की परख की जाती है जबकि ऐसी श्रेणी का बंटन सामान्य होता है।
इस अनुपात का प्रयोग सबसे पहले वॉन न्यूमैन (1944) द्वारा किया गया था। बड़े प्रतिदर्शजों में जिन्हें यादृच्छिक श्रेणियों के बंटन में से लिया जाता है, यह अनुपात उस स्थिति में सामान्य माना जाता है जब इसका माध्य 2 होता है और प्रसरण 4 (n—2) /(n2—1) होता है तथा जब प्रेक्षणों की संख्या n होती है।
Weighted average
भारित माध्य
ऐसे अंक या संख्याएं, जो विभिन्न पदों के आपेक्षिक महत्व को प्रगट करती हैं भार कहलाती हैं।
विभिन्न पदों के लिए उनको आपेक्षिक महत्व के अनुसार भार नियक्त करना भार-बंटन कहलाता है।
इस प्रकार से परिकलित माध्य को भारित माध्य कहते हैं।
इसे उस समय प्रयोग में लाया जाता है जब प्रेक्षित मानों में सभी का महत्व एक समान न हो । सूत्र रूप में:—
भारित माध्य=Σwx/Σw
जहाँ X पद मान है तथा W पदमान का वह भार है जो उसके आपेक्षिक महत्व के आधार पर उस पद के लिए निर्दिष्ट किया जाता है।