प्रत्यक्ष अपचयन प्रक्रम
कच्चे लोहे के मध्यवर्ती अवस्था से गुजरे बिना सीधे प्रगलन द्वारा अयस्क से स्पंजी लोहा बनाने की विधि। इस विधि में मंद लाल ताप पर कार्बन, कार्बन मोनोक्साइड अथवा हाइड्रोजन द्वारा लोहे के ऑक्साइडों का अपचयन किया जा सकता है। इसे प्रत्यक्ष प्रक्रम भी कहते हैं।
Discaloy
डिस्केलॉय
सर्पणरोधी फेरस मिश्रातु जिसमें 55% लोहा, 25% निकैल, 13% कोबाल्ट, 3% मॉलिब्डेनम, 0.7% सिलिकन, 0.7% मैंगनीज 0.5% ऐलुमिनियम और 0.05% कार्बन होता है। इसका उपयोग गैस टर्बाइन डिस्कों में किया जाता है।
Dislocation
प्रभंश
क्रिस्टल-संरचना में पाए जाने वाले रैखिक दोष। मूलतः निम्नलिखित दो प्रकार के प्रभ्रंश होते हैं।
(क) कोर-प्रभ्रंश (Edge dislocation)--- इसमें सीधी धार के साथ-साथ परमाणुओं की एक पंक्ति होती है जो क्रिस्टल के अंदर सर्पण-तल के ऊपर परमाणुओं का एक अतिरिक्त अर्धतल बनाती है।
(ख) स्क्रू प्रभ्रंश (Screw dislocation)-- इस प्रकार के दोष में जालक तल, प्रभ्रंश रेखा के अनुदिश सतत सर्पिल वेष्टन के रूप में अत्यंत विकृत रहते हैं।
प्रभ्रंश-रेखा में कोर और स्क्रू दोनों प्रकार के प्रभ्रंश हो सकते हैं। कभी-कभी एक प्रभ्रंश दो या अधिक आंशिक प्रभ्रंशों में वियोजित हो जाता है। प्रभ्रंश की गति एक सदिश द्वारा व्यक्त की जाती है जिसे बर्गर सदिश कहते हैं।
देखिए-- Burger vector भी
Dislocation climb
प्रभ्रंश आरोह
एक प्रक्रम जिसमें कोर प्रभ्रंश, एक सर्पण-तल से दूसे सर्पण-तल में गमन करता है। इस प्रक्रम में क्रिस्टल के अंदर परमाणुओं और रिक्तियों का विसरण होता है। प्रभ्रंश आरोह का उपयोग बहभुजन और उच्च ताप विसर्पण में होता है।
Dislocation mill
प्रभ्रंश मिल
देखिए -- Frank Rhead source
Dispersant
परिक्षेपक
वह पदार्थ जो प्राथमिक कणों के विऊर्णन द्वारा द्रव-माध्यम में कणों के निलंबन को अधिक स्थायी बना देता है।
Dispersion
परिक्षेपण
तरल या ठोस माध्यम में सूक्ष्म कणों का समान रूप से वितरण। ठोस माध्यम में यह वितरण सामान्य रूप से नहीं हो पाता। बहुधा इस शब्द का प्रयोग मृतिका के सूक्ष्मता-परीक्षण में होता है।
Dispersion hardening
परिक्षेपण कठोरण
देखिए-- Hardening के अंतर्गत
Dispersion strengthening
परिक्षेपण प्रबलन
देखिए-- Hardening के अंतर्गत Dispersion hardening
Distillation
आसवन
किसी द्रव को वाष्प में बदलना फिर वाष्प को द्रवित करना तथा अंत में द्रवित वाष्प अथवा आसुत को एकत्र करना। इसका उपयोग भिन्न क्वथनांक वाले द्रवों के मिश्रणों को पृथक करने में अथवा शुद्ध द्रव को अवाष्पशील अवयव से पृथक करने में होता हैं। आसवन निम्नलिखित प्रकार के होते हैं :
समष्टि आसवन (Bulk distillation)-- किसी वाष्पशील द्रव की संपूर्ण मात्रा को एक साथ अवाष्पशील अवयव से आसवन द्वारा पृथक करना।
प्रभाजी आसवन (Fractional distillation)-- प्रभाजी स्तंभों की सहायता से भिन्न तापों पर आसवन द्वारा, भिन्न क्वथनांक वाले द्रवों कों पृथक करना।