हीरक, हीरा
कार्बन का अत्यंत शुद्ध रूप जो त्रिसमलंबाक्ष क्रिस्टलों के रूप में पाया जाता है। हीरा सबसे अधिक कठोर खनिज है (कठोरता 10)। यह कोरंडम से 140 गुना कठोर होता है। कठोरता में इसकी बराबरी केवल बोरोन कार्बाइड ही करता है। हीरे में से ऐक्स किरणें पार हो जाती हैं। इसका अपवर्तनांक 2.42 तथा आपेक्षिक घनत्व 3--3.55 है।
हीरे दो प्रकार के होते हैं-- (1) औद्योगिक (2) माणिक। औद्योगिक हीरों को काले हीरे भी कहते हैं और ये अल्पपारदर्शी होते हैं। इनका उपयोग बहुमूल्य पत्थरों के रूप में नहीं होता, अतः ये केवल अपघर्षक और शैल-कर्तकों के रूप में ही काम आते हैं। माणिक हीरों का उपयोग बहुमूल्य पत्थरों के रूप में आभूषण आदि बनाने में होता है। ये अत्यंत पारदर्शी होते हैं और इनमें एडमेन्टाइन द्युति होती है।
Diamond Pyramid hardness test
हीरक पिरैमिड कठोरता परीक्षण
देखिए-- Hardness test daimond hardness के अंतर्गत Pyramid test
Dianodic process
द्वि-ऐनोडी प्रक्रम
धातुओं को गर्तन से बचाने की विधि। इसमें वरणात्मक PH परासों में आण्विकतः निर्जलित फॉस्फेटों और क्रोमेटों की द्वैत क्रिया की जाती है। कम सांद्रताओं पर इस प्रक्रम से जो लाभ होते हैं वे किसी एक क्रिया से उच्च सांद्रताओं पर प्राप्त नहीं हो सकते।
Diaspore
डायोस्पोर
जलयोजित ऐलुमिनियम ऑक्साइड, Al₂O₃ H₂O, जिसमें 85% Al₂O₃ होता है। यह कोरंडम और एमरी के साथ कुछ बॉक्साइडों में पाया जाता है। इसका उपयोग उच्चतापसह पदार्थ के रूप में होता है। गलनांक 2,050°C कठोरता 7, आपेक्षिक घनत्व 3.5।
Die
रूपदा
1. मुद्रांकन के लिए प्रयुक्त धातु या सिन्टरित कार्बाइड का ब्लॉक। इसे चादरी धातु पर दबाया जाता है जिससे उस पर रुपदा की आकृति उत्पन्न हो जाती है।
2. कोई इस्पात का ब्लॉक जिसके अंदर से चूड़ियाँ होती है। पाइप या छड़ की ऊपरी सतह पर चूड़ियाँ बनाने के लिए इसमें कर्तक किनारे बने होते हैं।
3. पाती फोर्जन में इस्पात के ब्लॉक के जोड़े (युग्म) होते हैं। कुछ मुद्रांक (Impression) एक ब्लॉक में और कुछ दूसरे में होते हैं। नीचे का रूपदा निहाई (Anvil) से और ऊपर का स्वयं घन (Hammer) से जुड़ा रहता है जो ऊपर--नीचे होता है।
4. तार कर्षण में कोई छोटी प्लेट जिसमें शुंडाकार छिद्र होते हैं।
5. प्रतिरोध वेल्डिंग में वर्क कंटूर के आकार की वस्तु जिसका उपयोग वेल्डिंग किए जाने वाले हिस्सों को पकड़ने के लिए होता है।
6.फोर्ज-वेल्डिंग में प्रयुक्त एक युक्ति जिसमें कार्य गरम अवस्था में किया जाता है और आवश्यक दाब लगाया जाता है।
7. चूर्ण धातुकर्मिकी में वह घिरा स्थान जिसमें चूर्ण को संपीडित किया जाता है।
8. वह औजार जिसमें एक छिद्र होता है जिसमें से अतप्त कर्षण में नलियों को खींचा जाता है।
9. छिद्रण या संवेधन में वह तलीय औजार जिसमें पंचित्र निर्दिष्ट किया जाता है, जिसके फलस्वरूप धातु का अपरूपण हो जाता है। जब कंटूर के अंदर धातु का वांछित भाग होता है तो यह संक्रिया ब्लेंकन कहलाती है और यह रूपदा, ब्लेंकन—रूपदा कहलाता है। यदि कंटूर के अंदर उपस्थित पदार्थ को अलग कर दिया जाए तो इस संक्रिया को छिद्रण या संवेधन कहते हैं, तथा यह रुपदा, छिद्रण रुपदा या संवेघन रुपदा कहलाती है।
उदाहरणार्थ, धातु के वाशर आदि बनाने में बीच का छिद्र, छिद्रण-रुपदा द्वारा काटा जाता है क्योंकि कटा हुआ वृत्ताकार छोटा भाग बेकार जाता है। वाशर बनाने में उसकी बाह्य परिधि, ब्लेंकन रूपदा द्वारा काटी जाती है क्योंकि इस रुपदा के अंदर का भाग, वांछित भाग होता है।
Die casting
रूपदा संचकन
अंतिम रूप देने के लिए पिघली धातुओं को साँचे में डालना। इसमें गुरुत्व या दाब द्वारा धातु प्रविष्ट की जाती हैं।
गुरुत्व रुपदा संचकन--इस प्रक्रम द्वारा विभिन्न धातुओं या उनके मिश्रातुओं के संचक पिघले हुए धातु को गुरुत्व के प्रभाव में स्थायी संचकों में उड़ेल कर बनाए जाते हैं। इस विधि को स्थायी रूपदा संचकन भी कहते हैं ये स्थायी संचक इस्पात, ढलवाँ लोहा या कांस्य के बनाए जाते हैं। इस विधि द्वारा ठीक-ठीक आकार तथा परिमाप और उत्तम सज्जा वाले संचक प्राप्त होते हैं।
दाब रूपदा संचकन (Pressure die casting)-- इस प्रक्रम द्वारा विभिन्न धातुओं या उनके मिश्रातुओं के संचक बनाने के लिए पिघली हुई धातु को उच्च दाब (10,000 पाउंड प्रति वर्ग इंच) के साथ संचक या रूपदा में उड़ेला जाता है जिससे उत्पादन अधिक होता है। ये संचक रंध्र मुक्त होते हैं तथा इनमें आंकुचन भी नहीं होता।
Die cavity
रुपदा कोटर
किसी साँचे में उपस्थित रिक्त स्थान जिसमें धातु का संचकन, फोर्जन, संपीडन अथवा चक्रण किया जाता है।
Diehl process
डील प्रक्रम
सायनोजन ब्रोमाइड का अभिकर्मक के रूप में प्रयोग कर सोने और चाँदी को पुनः प्राप्त करने का प्रक्रम। यह सायनाइडन प्रक्रम का संशोधित रूप हैं।
Diffraction
विवर्तन
विकिरण किरण--पुंज में व्यतिकरण--प्रतिरूपों के बनने की परिघटना।
इलेक्ट्रॉन विवर्तन (Electron diffraction)-- इसका उपयोग जालक-अंतराल को नापने और आकाशी समूहों को ज्ञात करने के लिए होता है। जब इलेक्ट्रॉन विवर्तन पृष्ठसर्पी आपतन (grazing incidence) पर किया जाता है तो बहुत पतली पृष्ठीय पर्तों की जाँच की जा सकती है।
न्यूट्रॉन विवर्तन (Neutron diffraction)-- एक उपयोगी पूरक तकनीक है जिसमें न्यूट्रॉनों की अधिक वेधन शक्ति और भिन्न अवशोषण गुणों के कारण दूसरे प्रकार की माप जा सकती है। उदाहरणार्थ--एक सेंटीमीटर से अधिक मोटे पदार्थ पर वरीय अभिविन्यास प्रभाव देखे जा सकते हैं।
प्रकाशनीय विवर्तन (Optical diffraction)-- किसी वस्तु के किनारे से गुजरते समय प्रकाश तरंगों के फैलने की परिघटना। यह प्रकाश स्रोत के छोटा होने पर दिखाई देता है।
ऐक्स-किण विवर्तन (X-ray diffraction)-- दृश्य प्रकाश की भाँति ऐक्स-किरण विवर्तन भी किया जा सकता है। ऐक्स-किरण का तरंग दैर्ध्य, धातुजालक-अंतराल की कोटि का होता है अतः उपयुक्त अवस्थाओं में परमाणुओं के तल, विवर्तन उत्पन्न करते हैं जिनकी सममिति की मदद से धातु जालक का विस्तृत निर्धारण किया जा सकता है।