किसी संवृत (बंद ) नलिका में जब किसी बिन्दु, पर जल का निरपेक्ष दाब जल के वाष्प दाब से कम हो जाता है (प्रवाहित जल के तापमान पर) तो जल से वाष्प निकलने लगती है और वह उबलने लगता है तथा इस लघु दाब क्षेत्र मे बुलबले निर्मित हो जाते हैं। इस क्रिया को कोटरण कहते हैं।
Cavities
कोटरिकायें
कोटरण क्रिया में जो बुलबुले उत्पन्न होते हैं उन्हें कोटरिकायें कहते हैं।
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अनुप्रस्थ केन्द्रक
एक प्रकार का खराद केन्द्रक। इसे टेकस्टॉक में लगाते हैं। इसमें बी - आकार का खांचा बना होता है जो कि खराद के समकोण पर रहता है। यह गोल कार्य को थामने में उपयोगी है जब छड़ में व्यास के उन्मुख छिद्र किया जा रहा हो। पृपया चित्र -5 देखें।
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केन्द्र दूरी (गरारी)
केन्द्र दूरी परस्पर मेलित दो गियरों के अन्तराल - वृत के व्यासों के जोड़ के आधे के बराबर होती है।
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केन्द्रक बरमा
यह एक लघु बरमा होता है जो कार्य को खराद - केन्द्रकों पर बांधने हेतु उसके सिरों पर इस बरमे से शंक्वाकार छिद्र बनाये जाते हैं। 60 डिग्री कोण पर छिद्र बने होते हैं ताकि कार्य खराद केन्द्रकों पर फिट हो सके। यह बरमा रीमर और बरमा - अनी का संयुक्त रूप होता है।
Centre gauge
केन्द्रक प्रमापी
चादर धातु से निर्मित प्रमापी, खराद कार्य में चूड़ी काटने वाले औजारों को संरेखित करने के काम आते हैं। इसमें एक 60 अंश कोण का शंक्वाकार सिरा तथा 60 अंश कोण के दो खांचे / नांच होते हैं जैसा कि चित्र में दिखाया गया है। सिरे वाले खांचे का इस्तेमाल कभी—कभी चूड़ी काटने वाले औजार को अचल केन्द्रक की कोणीयता के सापेक्ष सैट करने में किया जाता है। आन्तरिक चूड़ियों के लेय प्रमापी का प्रयोग चित्र 6 के अनुसार किया जाता है।
Centre of buoyancy
उत्प्लांवकता केन्द्र
तरल में प्लवमान किसी पिण्ड पर परिणामी या उत्प्लावक बल का क्रिया बिन्दु।
Centre of pressure
दाब केन्द्र
डूबी हुई पृष्ठ के जिस बिन्दु पर परिणामी बल कार्य करता है उसे दाब - केन्द्र कहते हैं .
Centre punch
केन्द्र - पंच
यह एक इस्पाती नुकीला औजार है जिससे बरमाई - कार्य आदि के लिये केन्द्र रेखाएँ,या केन्द्र चिंहित किये जाते हैं। कृपया चित्र - 7 देखें।