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Shiksha Paribhasha Kosh Part-2 (English-Hindi)
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Concepts, coding of
संप्रत्यय कूट संकेतन
बहुमाध्यम अध्यापन, संचार तथा दृष्य-श्रव्य सामग्री के संबंध में प्रयोग किया जानेवाला पद। इसका संबंध किसी संप्रत्यय के अर्थ को आत्मसात एवं व्यक्त करने से है।

Concept attainment
संप्रत्यय प्राप्ति
ब्रूनर के अनुसार संप्रत्ययन-प्रक्रिया में संप्रत्यय निर्माण से अगली एवं अंतिम स्थिति। इसमें संप्रत्यय पूर्व आविष्कृत हैं और विद्यार्थी को उन्हें सकारी और नकारी दृष्टांतों द्वारा सीखना होता है।

Concept enrichment
संप्रत्यय संवर्धन
पूर्व परिचित संकल्पना को अधिक सुनिश्चितता से परिभाषित करने के उद्देश्य से अध्यापक द्वारा प्रयुक्त विशेष प्रक्रिया जिसमें उस संकल्पना की सभी अनिवार्य विशेषताएं प्रदर्शित होती हैं। यह प्रक्रिया इस धारणा पर आधारित है कि विद्यार्थियों में संकल्पना से संबंधित पूर्व अनुभव इतने समृद्ध नहीं होते कि किसी पूर्ण अथवा उपयुक्त संकल्पना का निर्माण कर सकें। (दे. concept attainment)

Concept formation
संप्रत्यय निर्माण
ब्रूनर के अनुसार संप्रत्ययन प्रक्रिया का प्रथम चरण। इसमें समानताओं के आधार पर विभिन्न इकाईयों का एक कोटि में समूहन किया जाता है और इस प्रकार वर्गीकरण के एक नियम का निर्माण हो जाता है।

Concept of reversibility
विपर्यता संप्रत्यय
किसी विषयवस्तु की आकृति अथवा प्रतीक संकल्पना की व्यवस्था में परिवर्तन होने पर बालक की वह मानसिक संक्रिया जिसमें उस वस्तु अथवा व्यवस्था को पुनः उसके मूल रूप में लौटाया जा सकता है। संज्ञानात्मक सिद्धांतवादियों के अनुसार इस संक्रिया की योग्यता प्राप्तकर बालक पूर्व संक्रिया अवस्था से औपचारिक संक्रिया अवस्था में चला जाता है।

Conceptual system model
संप्रत्ययात्मक प्रणाली मॉडल
डेविड हंट द्वारा प्रतिपादित सिद्धांत जिसका लक्ष्य व्यक्तिगत संश्लिष्टता और नम्यता का संवर्धन करना है। व्यक्तिगत मॉडल की भांति यह उन प्रक्रियायों पर बल देता है जिनके द्वारा व्यक्ति अपनी अनन्य यथार्थता का निर्माण एवं संगठन करता है।

Conclusion oriented research
निष्कर्षमुखी अनुसंधान
निर्णयमुखी अनुसंधान की तुलना में इस प्रकार के अनुसंधान का संबंध उस जांच से है जो अनुसंधान की प्रतिबद्धताओं से नियंत्रित होती है। अनुसंधानकर्ता अपने संप्रत्ययों के विकास तथा परीक्षण के लिए स्वतंत्र होता है।

Concrete Operational stage
मूर्त संक्रियात्मक चरण
बच्चे में संख्या, दिक्काल आदि संप्रत्ययों के विकास से संबंधित पियाजे के सिद्धांतों की चार अवस्थाओं-संवेदगतिकी, पूर्व संक्रियात्मक, मूर्त संक्रियात्मक तथा औपचारिक संक्रियात्मक में से एक अवस्था। यह अवस्था प्रायः बच्चों में सात से ग्यारह वर्ष की आयु के बीच तक अपेक्षित है। इस अवस्था में बच्चा तर्कना के योग्य हो जाता है।

Confirming mechanism
पुष्टिकरण युक्ति
दृश्य अथवा श्रव्य संकेतों द्वारा यह निर्दिष्ट करने की विधि कि विद्यार्थी की अनुक्रिया सही है अथवा गलत।

Conjunctive concept
संयोजी संप्रत्यय
ब्रूनर द्वारा प्रतिपादित संप्रत्ययों के तीन प्रकारों (संयोजी, असंयोजी तथा संबंधी) में से एक। इस प्रकार के संप्रत्ययों की परिभाषा एक से अधिक गुणों के आधार पर की जाती है जैसे 'सेब' एक संयोजी संप्रत्यय है जिसमें आकारः गोल, वर्णः लाल-हरा, स्वादः मीठा या खट्टा, उपयोगः खाद्य पदार्थ है।


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