(1) कल्पना प्रक्रियाओं का समष्टि रूप या कल्पना प्रक्रिया।
(2) इंद्रियों के समक्ष अनुपस्थित चीजों का ऐसा मानसिक प्रतिनिधान या प्रत्यक्ष जिसे किसी कार्य के लिए विशेष रूप से प्रयुक्त किया जाता है।
Imbecile
हीनबुद्धि, बालिश
क्षीण बुद्धिता का वह स्तर जिसमें व्यक्ति की बौद्धिक क्षमता 3 वर्ष से 7 वर्ष के बालक की बुद्धि के समान होती है। ऐसे व्यक्ति की बुद्धि लब्धि 25 से 49 के बीच होती है। उसे प्राथमिक प्रशिक्षण द्वारा इस योग्य बनाया जा सकता है कि वह दैनिक चर्या के सामान्य कार्य कर सके।
Immobility of labour
श्रमिक गतिहीनता
रोजगार बदलने अथवा काम करने के लिए एक स्थान से दूसरे स्थान पर जाने में श्रमिक की असमर्थता।
Impaling
सूली चढ़ाना, शूलारोपण
मृत्यु दण्ड का एक अत्यंत प्राचीन तरीका जिसके अन्तर्गत या तो अपराधी के सीने में भाला या नुकीली लकड़ी घोप दी जाती थी या जमीन पर भालों अथवा नुकीली लकड़ियों को गाड़ कर अपराधी को एक ऊंचे स्थान से उस पर फेंक दिया जाता था।
Impotence
नपुंसकता, क्लीवता
पुरुष के अन्दर सम्भोग की क्षमता तथा इच्छा का लोप हो जाना। ऐंसा शारीरिक अथवा मानसिक कारणों से होता है। अत्यधिक थकान, चिन्ता तथा रोगग्रस्तता अथवा मानसिक द्वन्द्व, भय, निराशा तथा विषाद के कारण स्थायी अथवा अस्थायी रूप से कामेच्छा समाप्त हो जाती है।
Imprisoment
कारावास, कैद
दण्डस्वरूप व्यक्ति को जेल में रखना।
Impluse
अवेग
(1) किसी चितन या ऐच्छिक निर्देशन या किसी उद्दीपन के विभेदक नियंत्रण के बिना अविलंब किया गया कार्य-विशेष, हालांकि उस कार्य को करने में उद्दीपन का कुछ हाथ अवश्य रहता है किन्तु निर्धारक व्यक्ति की दशा विशेष ही होती है।
(2) एक प्रक्कल्पित शरीर-क्रियात्मक या अंतर्नेद -प्रभावित दशा जिससे कोई किया जाता है या उसके प्रति जागरूक हुआ जाता है।
Inadequacy
अपर्याप्तता
वैयाक्तिक गुणों अथवा आवश्यक मानसिक योग्यता एवं विशिष्ट ज्ञान के अभाववश वर्तमान परिस्थिति का सामान करने में व्यक्ति की अक्षमता।
Inadequate personality
अपर्याप्त व्यक्तित्व
ऐसा व्यक्तित्व जो बौद्विक, सांवेगिक, सामाजिक एवं भौतिक अवश्यकताओं की पूर्ति में अक्षम होता है। इस प्रकार के व्यक्तित्व में प्रायः निर्माण की क्षमता कम होती है तथा आवश्यक शारीरिक, सामाजिक और सांवेगिक सामर्थ का अभाव होता हैं।
Inarticulate industrial unrest
मूल औधोगिक अशांति, अस्पष्ट औधोगिक अशांति
ऐसी औधोगिक अशान्ति जिसके पीछे कोई स्पष्ट योजना नहीं होती और न ही श्रमिकों में सामंजस्य और एकरूपता की अभिव्यक्ति होती है। इसके पीछे अफवाह, अनिश्चितता तथा निरुद्देश्य कार्यवाहियाँ आदि होती हैं जो निराधार भय अथवा असंतोष के कारण उत्पन्न होती हैं।