संयुक्त पदार्थ
संरचना में सुधार लाने के लिए दो पदार्थों को मिलाने से बना पदार्थ। इसका उद्देश्य एक पदार्थ के वांछित गुणों को दूसरे के साथ मिलाना है। उदाहरणार्थ मृदा-धातु मिश्र, काँच-तंतु द्वारा प्रबलित प्लास्टिक आदि।
Compression ratio
संपीडन अनुपात
संहत चूर्ण के आयतन के साथ अबद्ध चूर्ण के आयतन का अनुपात।
Compression test
संपीडन परीक्षण
देखिए-- Mechanical test के अंतर्गत
Concentration of ore
अयस्क सांद्रण
वैल्यू से गैंग को पृथक करने की क्रिया ताकि धातुयुक्त खनिज उत्पाद में, जिसे सांद्र कहते हैं, वैल्यू की मात्रा बढ़ जाए। उसके लिए अनेक भौतिक अथवा भौतिक--रासायनिक गुणधर्मों का प्रयोग किया जाता है।
स्थिर वैद्युत् सांद्रण (Electrostatic concentration) अयस्क सांद्रण की एक विधि जो इस सिद्धांत पर आधारित है कि समान आवेश परस्पर प्रतिकर्षित तथा असमान आवेश परस्पर आकर्षित करते हैं। इसमें प्रभरण पदार्थों को घूमते हुए ड्रम के ऊपर से गुजारा जाता है जो ऋण इलेक्ट्रोड का काम करता है। कुछ दूरी पर एक अन्य ड्रम, पहले ड्रम की अपेक्षा उल्टी दिशा में घूमता है जो धन इलेक्ट्रोड का काम करता है। इस प्रकार स्थिर वैद्युत क्षेत्र बन जाता है। प्रभरण पदार्थ के कण-कण अपनी-अपनी चुंबकीय प्रवृति के अनुसार स्थिर वैद्युत बल रेखाओं के साथ गमन करते हैं। अ-प्रतिकर्षित पदार्थ ऊर्ध्वाधर तल में और प्रतिकर्षित पदार्थ ऊर्ध्वाधर के कुछ आगे की ओर जमा हो जाते है।
फेन प्लवन सांद्रण (Froth flotation concentration)-- सांद्रण की इस विधि में पिसे हुए अयस्क में हवा के बुलबुलों को प्रविष्ट कराकर जोर से हिलाया जाता है। क्रिया बड़े पात्रों में की जाती है जिनमें पानी, तेल और अन्य पदार्थ होते हैं जो कणों पर विशेष पृष्ठीय प्रभाव उत्पन्न करते हैं। खनिज के कण तेल से गीले होकर तथा चिपके हुए हवा के बुलबुलों से उत्प्लावित होकर सतह पर तैरने लगते हैं।
गुरुत्वं सांद्रण (Gravity concentration)-- इस विधि द्वारा सांद्रण इस सिद्धांत पर आधारित है कि विभिन्न खनिजों का घनत्व भिन्न भिन्न होता है और यह अंतर जितना अधिक होगा सांद्रण उतनी ही अधिक दक्षता से किया जा सकेगा। विशेष पात्रों में अयस्क को पानी के साथ हिलाया जाता है तो भारी कण, चाहे उनका आमाप कुछ भी हो, पात्र की तली में बैठ जाते हैं तथा हलके कण सतह पर तैरने लगते हैं। इस विधि का उपयोग फेन-प्लवन विधि के साथ भी किया जाता है।
चुंबकीय सांद्रण (Magnetic concentration)— चुंबक द्वारा अचुंबकीय पदार्थ से चुंबकीय पदार्थ को पृथक करना। जिन पदार्थ को पृथक करना होता है उसे वाहक पेटी के ऊपर ले जाया जाता है।
Concentration circuit
सांद्रण परिपथ
खनिज सज्जीकरण (Mineral benefication) के संदर्भ में यह शब्द प्रक्रम आरेख (Flow sheet) में प्रयुक्त विभिन्न सांद्रण इकाइयों के भौतिक विन्यास को व्यक्त करता हैं। विभिन्न सांद्रण-परिपथ इस प्रकार है :--
(1) रूक्षण (Roughing)
देखिए-- Breaking down
(2) अपमार्जन (Scavenging)-- अपेक्षाकृत रुक्ष पछोड़नों का पुनः उपचार करना ताकि उसमें विद्यमान वैल्यू को प्राप्त किया जा सके।
(3) निर्मलन (Cleaning)-- अपेक्षाकृत स्थूल सांद्र का पुनः उपचार करना ताकि उसकी कोटि को बढ़ाया जा सके।
(4) पुनः निर्मलन (Re-cleaning)-- अपेक्षाकृत निर्मल सांद्र का पुनः उपचार करना ताकि उसकी कोटि में और वृद्धि की जा सके।
Conductometri analysis
चालकत्वमितीय विश्लेषण
विश्लेषण की एक भौत रासायनिक विधि जिसमें विश्लेष्य घटकों के सांद्रणों को मापने के लिए विद्युत अपघट्यों की विद्युत चालकता का प्रयोग किया जाता है। इस्पात के संदर्भ में इस विधि का प्रयोग उनमें कार्बन की सूक्ष्म मात्राओं को निर्धारित करने के लिए किया जाता है। कार्बन-ऑक्साइड के अवशोषण के फलस्वरूप बेरियम हाइड्रॉक्साइड विलयन की चालकता में हुए परिवर्तन को मापा जाता है।
Cone mill
शंकु मिल
सीवनहीन इस्पात--नलियों के उत्पादन की मिल जिसमें 60°C कोण पर स्थिर शंक्वाकार बेलनों का प्रयोग किया जाता है।
Conform
कॉन्फॉर्म
एक नया उत्सारण प्रक्रम जिसमें बिलेट और पात्र के बीच उत्पन्न सामान्य घर्षण का उपयोग रूपदा के द्वारा उत्सारण के लिए आवश्यक दाब उत्पन्न करने के लिए किया जाता है और इस प्रकार ऊर्जा की बचत हो जाती है। इसमें स्टॉक को पहले एक खाचित पहिए में और फिर धातु को स्थिर ब्लाक (जिसे शू कहते हैं) में भर दिया जाता है जिसमें उत्सारण रूपदा लगी होती है। शू, उत्सारण कक्ष का बंद सिरा बनता है। पहिए के घूमने से उत्पन्न घर्षण-बलों के कारण स्टॉक का दाब बढ़ जाता है और फलस्वरूप ताप भी बढ़ जाता है। शू के अंत में एक आधार होता है जिस पर रूपदा स्थित रहती है और उसमें से स्टॉक को बलपूर्वक प्रविष्ट किया जाता है, जैसा कि सामान्य उत्सारण-प्रक्रम में होता है। यह पहला सफल सतत् उत्साण प्रक्रम है।
Conpernik
कानपर्निक
एक फेरस मिश्रातु जिसमें 50% लोहा और 50% निकैल होता है। अभिवाह घनत्व के विस्तृत परास तक इसकी चुंबकशीलता स्थिर रहती है। इसका उपयोग वैद्युत चुंबकीय युक्तियों में किया जाता है।
Constantan
कान्सटेन्टन
निकैल-ताम्र मिश्रातु जिसमें 40% निकैल और 60% तांबा होता है। निकैल की उपस्थिति इस मिश्रातु के अवरोध को बहुत बढ़ा देती है। अन्य निकैल-ताम्र मिश्रातुओं की अपेक्षा इसका ताप गुणांक कम और तापीय वि0वा0ब0 सर्वाधिक है। अवरोधकता 49.1 ओम/ सेमी0, घनत्व 8.88, औसत ताप--गुणांक --0.00002। इसका उपयोग अवरोधक कुंडलियों और ताप युग्मों को बनाने के लिए होता है। इसे 900°C ताप तक इस्तेमाल किया जा सकता है।