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Definitional Dictionary of Philosophy (English-Hindi)
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Fallacy Of Consequent
फलवाक्य दोष हेतु और फल को परस्पर विनिमेय मान लेने से उत्पन्न होने वाला तर्कदोष। उदाहरण : यदि धर्म सचमुच आत्मोन्नति का साधन है, तो उसका कभी नाश नहीं होता; हिंदू धर्म का जो कि अनादिकाल से चला आ रहा है, नाश नहीं हुआ है; अतः हिंदू धर्म सचमुच आत्मोन्नति का साधन है।

Fallacy Of Context Mixing
संदर्भ-संकरण-दोष एक प्रकार का दोष जो किसी युक्ति में तब पैदा होता है जब उसमें एक भिन्न में ही सार्थकता रखने वाले शब्द का प्रयोग होता है। उदाहरण : भेडिए अभिमान नहीं करते, झूठ नहीं बोलते; इसलिए वे मनुष्य से अधिक नीतिपरायण हैं। (यहाँ भेड़िए के संदर्भ में ऐसे शब्दों का प्रयोग किया गया है जो मनुष्य की चर्चा में ही सार्थकता रखते हैं।)

Fallacy Of Denying The Antecedent
हेतुवाक्य-निषेध-दोष पक्ष-आधारवाक्य में हेतुवाक्य का निषेध करके निष्कर्ष में फलवाक्य का निषेध करने का दोष। जैसे : ` यदि 'अ' है तो 'ब' है; 'अ' नहीं है; अतः 'ब' नहीं है। `यदि युद्ध होता है तो विनाश होता है; युद्ध नहीं हो रहा है; अतः नहीं हो रहा है।`

Fallacy Of Division
विग्रह-दोष किसी पद को पहले समष्टिक अर्थ में ग्रहण करके बाद में व्यष्टिक अर्थ में इस्तेमाल करने से उत्पन्न तर्कदोष। उदाहरण : `इस कमरे में विद्यमान सभी व्यक्तियों का वजन आठ क्विन्टल है; हरि इस कमरे में मौजूद एक व्यक्ति है; अतः हरि का वजन आठ क्विन्टल है।`

Fallacy Of Double Question
द्विगुणित प्रश्न-दोष देखिए `fallacy of complex question`।

Fallacy Of Doubling The Bet
पण-द्विगुणन-दोष यह मानने की गलती करना कि चितपट जैसे खेल में, जिसमें विकल्प समान रूप से प्रसंभाव्य होते हैं, यदि कोई एक ही बात पर शर्त लगाता जाए और हारने पर शर्त को दुगना करता जाए तो अंत में वह अवश्य जीतेगा।

Fallacy Of Equivocation
अनेकार्थक दोष युक्ति में किसी अनेकार्थक शब्द के प्रयोग से उत्पन्न होने वाला दोष। जैसे : `लाल एक रंग है; रक्त लाल होता है; अतः रक्त एक रंग है।`

Fallacy Of Exclusive Linearity
ऐकान्तिक रेखीयता-दोष अनुचित रूप से यह मान बैठना कि अनेक तत्व इस प्रकार संबंधित हैं कि उनसे अनिवार्यतः एक रेखावत् क्रम बन जाता है।

Fallacy Of Exclusive Particularity
ऐकान्तिक विशिष्टता-दोष, व्यावर्तक विशेषता-दोष यह मान लेने का दोष कि यदि एक वस्तु एक संदर्भ में एक संबंध रखती है तो वह उसी या किसी अन्य संदर्भ में कोई अन्य संबंध नहीं रख सकती। उदाहरण : यदि एक व्यक्ति किसी स्त्री का पति है तो यह मान लेना कि वह किसी का पिता या भाई नहीं हो सकता। इस शब्द का प्रयोग सर्वप्रथम आर. बी. पैरी ने विज्ञानवाद का खण्डन एवं वस्तुवाद का खण्डन एवं वस्तुवाद का मण्डन करने के लिये किया था।

Fallacy Of Existential Assumption
अस्तित्वाभिग्रह-दोष यदि स्पष्ट रूप से यह न बताया गया हो कि एक वस्तु का अस्तित्व है तो उसके अस्तित्व को नहीं मान लेना चाहिए। इस नियम के विपरित अस्तित्व मान लेने का दोष।


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