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Paribhasha Kosh (Arthmiti, Janankiki, Ganitiya Arthshastra Aur Aarthik Sankhyiki) (English-Hindi)
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Net reproduction rate
शुद्ध प्रजनन दर
एक स्त्री जन्म-सहगण से औसतन पैदा होने वाली लड़कियों की संख्या।
इस दर का परिकलन करते समय प्रचलित मृत्यु दर, जनन दर विवाह दर तथा विवाह भंग दरों को स्थिर या अपरिवर्तित माना जाता है।
तुल∘ दे∘ reproduction rate

Non-linear correlation
अरैखिक सहसंबंध
इसके अन्तर्गत हमें यह देखना होता है कि:—(1) क्या अभिनिर्धारण का अरैखिक सहसंबंध निचली कोटि के वक्र के आधार पर सार्थकता से बड़ा है अथवा छोटा, (2) क्या अरैखिक सहसंबंध 0 से सार्थक रूप से बड़ा है।
इस संकल्पना की सहायता से हम किसी समष्टि के सहसंबंध का आकलन करते हैं। दो चरों के बीच का संबंध जब सरल रेखा से प्रदर्शित नहीं किया जा सकता तो हमें उनके बीच अरैखिक सहसंबंध की संकल्पना की आवश्यकता पड़ती है।

Non-linearity
अरैखिकता
जब कोई संबंध या समीकरण रैखिक नहीं होता तो इसे अरैखिक कहा जाता है और इसके इस गुण को अरैखिकता।
अधिकांश अरैखिक संबंधों को जो बहुपदीय नहीं होते लघुगणक प्रणाली के माध्यम से रैखिक संबंधों में रूपांतरित किया जा सकता है उदाहरणार्थ कॉब-डगलस का अरैखिक उत्पादन फलन-- X=〖AL〗^∝ K^β U
इसे लघुगणकीय प्रणाली से रैखिक रूप में भी लिखा जा सकता है अर्थातः log⁡ x=log⁡ A+∝log⁡ L+β log⁡ k+log⁡u

Non-linear model
अरैखिक मॉडल यह मॉडल लघुगणक फलन, घात फलन, द्विघात फलन इत्यादि प्रकार का भी हो सकता है।
ऐसा मॉडल जिसमें समस्या के व्यवहार्य संबंध रैखिक प्रकार के न हों।
यह मॉडल लघुगणक फलन, घात फलन, द्विघात फलन इत्यादि प्रकार का भी हो सकता है।

Non-match
अनमेल
दोहरी अभिलेख विधि में आँकड़ों के ऐसे दो समूह जो सुमेलन और सत्यापन की प्रक्रियाओं में भिन्न-भिन्न घटनाओं अथवा व्यक्तियों से संबंधित हों।

Nonsingularity
व्युत्क्रमणीयता
जब किसी वर्ग आव्यूह का प्रतिलोम आव्यूह होता है तो उसके इस गुण को व्युत्क्रमणीयता कहा जाता है।
जब कोई प्रतिलोम नहीं होता तब उसे अव्युत्क्रमणीय (Singular) कहा जाता है।
तुल∘ दे∘ singular matrix

Normal distribution
प्रसामान्य बंटन प्रसामान्य बंटन का आलेखी निरूपण प्रसामान्य वक्र कहलाता है तथा यह एक मसृण संतत पूर्ण सममित घण्टाकार वक्र होता है। इसका चित्र नीचे दिया जाता है: () चित्र एक प्रूसामान्य बंटन में माध्य () वे सीमाएं हैं, जिनके भीतर वास्तविक माध्य के विचरण होने की संभावना है और इनसे बाहर जाने की प्रायिकता बहुत ही कम (.0026) है।
कोई यादृच्छिक चर x तब प्रसामान्यतः बंटित कहा जाता है जब उसका प्रायिकता घनत्व फलन निम्नलिखित हो:-- f(x)=1/(σ√2π) 〖e̅(x-u)〗^2/σ2σ : -∞ < x < ∞
प्रसामान्य बंटन वस्तुतः द्विपद बंटन का ही सीमांत रूप है। जब q-p का अन्तर बहुत कम हो अर्थात् q-p लगभग शून्य हो व n अभिप्रयोगों की संख्या बहुत अधिक हो (अर्थात् n>-∞), तो N_(〖(q-p)〗^n ) द्विपद बंटन का सीमांत रूप प्रसामान्य बंटन कहलाता है तथा y(x)=1/(σ√2π) 〖e̅-(x-m)〗^2/〖2σ〗^2 द्वारा निश्चित किया जाता है । उक्त समीकरण में m तथा σ क्रमशः माध्य व मानक विचलन को प्रगट करते है।
प्रसामान्य बंटन का आलेखी निरूपण प्रसामान्य वक्र कहलाता है तथा यह एक मसृण संतत पूर्ण सममित घण्टाकार वक्र होता है। इसका चित्र नीचे दिया जाता है: (DIAGRAM)
एक प्रसामान्य बंटन में माध्य ± σ वे सीमाएं हैं, जिनके वास्तविक माध्य के विचरण होने की संभावना है और इनसे बाहर जाने की प्रायिकता बहुत ही कम (0.0026) है।

Nubile, marriage rate
विवाह्य दर
ऐसे लोग जो किसी दिए वर्ष में विवाह के घेरे में बंध सकते हैं विवाह जनसंख्या के अन्तर्गत आते हैं। यह विवाह योग्य लोगों की औसत जनसंख्या होती है। इस वर्ग में आने वाले लोगों की न्यूनतम आयु 15 वर्ष मानी जाती है। इस दर को सूत्र रूप में यों लिखा जाता है:—
वर्ष के दौरान विवाहों की संख्या विवाह्य लोगों की विवाह दर =--------------------------------------------- × 1000 मध्य वर्ष में जनसंख्या में 15 अथवा उससे ऊपर की आयु के अविवाहितों (पुरूषों तथा स्त्रियों) की संख्या + विधुर तथा विधवाऒं की संख्या + तलाक शुदा व्यक्तियों की संख्या
तुल∘ दे∘ marriage rate

Nuisance variable
कंटक चर
ऐसे चर जो एक कंटक के समान किसी मॉडल में चुभन या अटपटापन पैदा करते है तथा विशेष महत्व रखते हैं।
प्राचलों का आकलन करते समय इनको नजर-अंदाज नहीं किया जा सकता।
जैसे खाद्य सामग्री के उपभोग के अध्ययन में सर्वाधिक महत्वपूर्ण चर “परिवार का आकार” माना जाएगा।

Null hypothesis
निराकरणीय परिकल्पना
सार्थकता के प्रसंग में एक ऐसी परिकल्पना जिसका परीक्षण द्वारा निराकरण करने का प्रयत्न किया जाता है।
जैसे हम यह परिकल्पना कर सकते हैं कि प्रतिदर्श माध्य तथा समष्टि माध्य में सार्थक अंतर नहीं है। या प्रतिदर्श माध्य का समष्टि माध्य से विचलन सार्थक रूप में शून्य से भिन्न नहीं है, आदि।


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