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Paribhasha Kosh (Arthmiti, Janankiki, Ganitiya Arthshastra Aur Aarthik Sankhyiki) (English-Hindi)
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Matrix
आव्यूह
एक बीजगणितीय विधि जिसमें किसी क्षेत्र से संबद्ध pq अवयवों को एक विशेष व्यवस्था के अन्तर्गत लिखा जाता है।
आव्यूह के अंतर्गत इन अवयवों को p पंक्तियों और q स्तंभों के रूप में दिखाया जाता है। प्रत्येक अवयव की पहचान युग्म (i, j) द्वारा की जाती है जो क्रमशः उस अवयव की पंक्ति या स्तंभ संख्या का द्योतक होता है।
आव्यूह को आमतौर पर चिह्ह [A] द्वारा दिखाया जाता है अथवा संकेत (aij) के रूप में लिखा जाता है जिसमें aij अविष्टि (aij) का द्योतक होती है।

Maximum likelihood estimation
अधिकतम संभावित आकलन
यह आकलन की एक ऐसी विधि है जिसमें प्राचलों के लिए ऐसे को चुना जाता है जिनसे प्रेक्षित प्रतिदर्श का जनन किया जा सके।
इस विधि द्वारा जनित आकलक अधिक संगत तथा उपगामी दृष्टि से प्रसामान्य और दक्ष होते हैं।
इस विधि में मॉडल के संभावित फलन को अधिकतम बनाने का यत्न किया जाता हैं।
फलन के लघुगणकों को अधिकतम बनाने से मॉडल का अधिकतम संभाविता आकलक ज्ञात किया जा सकता है।

Mean deviation
माध्य विचलन
एक माध्य (समांतर माध्य, माध्यिका या बहुलक) से पदमानों के विचलन।
व्यवहार में यह विचलन प्रायः माध्यिका से लिया जाता है क्योंकि माध्यिका से पद-मानों के विचलन का योग न्यूनतम होता है। साथ ही विचलन का योग करते समय हम उसके धनात्मक या ऋणात्मक चिन्ह की उपेक्षा करके छोड़ देते हैं।
इस प्रकार माध्य विचलन=(माध्यिका से विभिन्न पद मानों के निरपेक्ष विचलनों का योग)/(पद संख्या) अथवा M.D.= (∑▒|d| )/N यहाँ |d| पद मान का माध्य या माध्यिका से लिया निरपेक्ष विचलन का मान है।

Mean population
औसत जनसंख्या
औसत जनसंख्या किसी क्षेत्र की एक निश्चित अवधि के मध्य की जनसंख्या होती है।
यदि अवधि कलैंडर वर्ष की हो तो वर्ष के मध्य अर्थात 30 जून की जनसंख्या को औसत जनसंख्या माना जाएगा।

Measure of central tendency
केन्द्रिय प्रवृत्ति का माप
बारंबारता बंटन का संक्षिप्त रूप में प्रतिनिधित्व करने वाली परिकलित संख्या।
यह संख्या उक्त बंटन की केंद्रीय प्रवृत्ति का माप होती है तथा उसके परिमाण को बताती है। इस माप के निम्नलिखित रूप होते है:— 1. योगात्मक या समांतर माध्य, 2. माध्यिका, 3. बहुलक. 4. भारित माध्य, 5. गुणोत्तर माध्य तथा 6. हरात्मक माध्य।

Measure of economic welfare (MEW)
आर्थिक कल्याण मापाँक
किसी देश की संपन्नता का सूचकाँक। इसमें सकल राष्ट्रीय उत्पाद (GNP) मुख्य तत्व होता है।
आर्थिक संवृद्धि के तीन निर्धारक होते हैं:—1. श्रम शक्ति, 2. तकनीकी व्यवस्था तथा 3. पूँजी का स्टॉक।
इन्हीं के आधार पर संवृद्धि की वार्षिक दर तथा दीर्घावधिक प्रवृत्तियाँ निकाली जाती हैं।
सकल राष्ट्रीय उत्पाद के सूचकांक में राष्ट्रीय खपत के कुछ आवश्यक तत्वों को छोड़ दिया जाता है जिनका आर्थिक कल्याण से घनिष्ठ संबंध है।
अतः नीति निर्देशक तत्व के रूप में अब यह स्वीकार किया जाने लगा है कि सकल राष्ट्रीय उत्पाद के स्थान पर आर्थिक कल्याण के मापाँक (MEW) को जिसमें प्रति व्यक्ति उपभोग के स्तर को शामिल किया जाता है, देश की समृद्धि का सूचक माना जाना चाहिए।
साधारणतः आर्थिक कल्याण का यह मापाँक सकल राष्ट्रीय उत्पाद (GNP) के (2/3) के बराबर होता है और इसका वास्तविक मापाँक कई बार पूँजी की खपत और समृद्धि की उपेक्षाओं के अनुसार अवधार्य मापाँक से बढ़ सकता है या कम हो सकता है। जब यह वर्धमान हों तब अर्थव्यवस्था भावी नियोजन के मार्ग पर अग्रसर मानी जानी जाती है और उसमें चालू उपभोग का स्तर ऊँचा माना जाता है। साथ ही यह समझा जाता है कि लोग भविष्य की तुलना में वर्तमान उपभोग को तरजीह देना चाहते हैं। इस मापाँक को निवल आर्थिक कल्याण (NEW) की संज्ञा भी दी जाती है।

Median
माध्यिका
माध्यिका एक केन्द्रीय मान होता है।
यह परिमाण के आरोही या अवरोही क्रम में दी गई सारणी के केन्द्रीय पद का माप है।
माध्यिका, मध्य-पद का मान है तथा श्रेणी को दो समान भागों में विभाजित करता है अर्थात् माध्यिका उस पद का माप है जिसके पूर्ववर्ती भी उतने ही पद हैं जितने यह उसके परवर्ती या बाद में हैं। केन्द्रीय पद स्वयं माध्यिका नहीं है, बल्कि उसका परिणाम माध्यिका कहलाता है।
कुल पदों में से आधे पद उससे बड़े तथा आधे उससे छोटे होते हैं।

Median expectation of life
माध्यिका जीवन प्रत्याशा
ऐसी आयु जिसमें 100,000 सहगणों में से उसके आधे अर्थात् 50,000 सहगण ही जीवित बचते हैं।
यह एक ऐसी आयु होती है जिस पर मनुष्य के जीने और मरने की बराबर-बराबर संभावना होती है।
जीवन की संभावना की यह गणना प्रायः जन्मकाल से प्रारंभ की जाती है।

Method of least squares
न्यूनतम वर्ग विधि
न्यूनतम वर्ग विधि का प्रयोग वक्र के श्रेठतम आसंजन के लिए किया जाता है।
इस विधि के अनुसार एक रेखा तभी श्रेष्ठतम आसंजन की रेखा होगी जब इस रेखा से बिन्दुओ के विचलनों की उर्ध्वाधर दूरियों के वर्गों का जोड़ किसी अन्य रेखा से उन बिन्दुओं के विचलनों के वर्गों के जोड़ की अपेक्षा कम होगा। अर्थात् जब उस रेखा से बिन्दुओ के उर्ध्वाधर विचलनों (दूरियों ) के वर्गों का योग न्यूनतम होगा।

Metropolitan area
महानगर क्षेत्र
महानगर ऐसे बड़े-बड़े शहर हैं जिनमें आसपास के सभी प्रदेशों से लोग आकर नौकरी या कारोबार के लिए बस जाते हैं और जहाँ अंतर्राष्ट्रीय आवागमन होता रहता है।
जनसंख्या की दृष्टि से एक महानगर की आबादी 10 लाख से ऊपर होनी चाहिए।
महानगरों के क्षेत्र के अन्तर्गत नियमित क्षेत्र तथा छोटी-छोटी बस्तियाँ व उपनगर होते हैं जहाँ से लोग केन्द्रीय स्थानों में पहुँचकर जीविकोपार्जन और कारोबार करते हैं।
शहरी भूमि अधिकतम सीमा अधिनियम 1976 के अनुसार कलकत्ता, मुम्बई, दिल्ली और मद्रास इन चार शहरों को 'क' श्रेणी के महानगर क्षेत्र माना गया है।


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