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Paribhasha Kosh (Arthmiti, Janankiki, Ganitiya Arthshastra Aur Aarthik Sankhyiki) (English-Hindi)
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Liquidity function
तरलता फलन
मुद्रा माँग फलन
तुल∘ दे∘ liquidity trap

Liquidity trap
तरलता जाल
मुद्रा की माँग का वह गुण जिसके अनुसार द्रव्य की माँग तब तक निरंतर बढ़ती जाती है जबतक कि ब्याज की दर शून्य नहीं हो जाती।
इस दर पर पहुँच कर प्रत्येक व्यक्ति धन को तरल रूप में अपने पास रखने की इच्छा करता है।
इस संकल्पना का प्रयोग सबसे पहले कीन्स ने अपने मुद्रा सिद्धांत में किया था।

Live birth
जीवित जन्म
गर्भस्थ शिशु का जीवित अवस्था में जन्म या जिंदा प्रसव।
जन्म के समय बच्चा जिन्दा भी हो सकता है और मरा हुआ भी। जब शिशु में जन्म के उपरांत जीवन के चिन्ह मौजूद होते हैं तो इसे जीवित जन्म कहा जाता है।
जन्म दर और प्रजनन संबंधी अध्ययनों में जीवित जन्मों संबंधी आँकड़ों का विशेष महत्व होता है।

Logarithmic function
लघुगणकीय फलन
ऐसे फलन जिनमें चरों के लघुगणक आते हैं लघुगणकीय फलन कहलाते हैं जैसे:—
y=〖log〗_e x ; e^y=x ;y=f(log⁡〖x)〗 log⁡y=log⁡a+x log⁡〖b ; 〗 y=ab ; log⁡〖y=f(x)〗 log⁡y=log⁡a+b log⁡〖x ; 〗 log⁡〖y=f(log⁡x)〗सामान्यतया y=f(log ⁡x) को ही लघुगणकीय फलन कहते हैं।

Logistic curve
वृद्धिघात वक्र
वृद्धिघात वक्र जनसंख्या की असीमित वृद्धि के विरूद्ध कार्य करने वाले तत्वों के प्रतिरोध को जनसंख्या में जोड़ने के बाद पाई जाने वाली वृद्धि की प्रवृत्ति के वेग के वर्ग के अनुपात से प्राप्त आँकड़ों की मदद से खींचा या अंकित किया जाता है।
सर्वप्रथम इसका निरूपण 1835 में क्वेले (Quetelet) ने किया था। इसका दूसरा नाम 'पर्लरीड' (Pearl-Reed) वक्र भी है। इस वक्र की आकृति नीचे दिए गए चित्र के अनुरूप होती है:— (DIAGRAM)
इस वक्र का समीकरण निम्नलिखित है : Y_c=k/〖1+e〗^(a+bk) यहाँ Y_c =किसी निश्चित समय की जनसंख्या k=एक स्थिरांक a=स्थिरांक b=वृद्धि दर x=समय

Loss function
हानि फलन
यदि ∝ कोई प्राचल हो और α इसका बिंदु आकलक हो तब α और ∝ का अंतर हानि फलन कहलाएगा।
इसे संकेत रूप में यों लिखा जा सकता है:— L = L₁, (α, α) यहां L₁,(α, α) = 0 अथवा L = L₂ (α — α) यहां L₂( 0 ) = 0 हानि हमेशा α—α के निरपेक्ष अंतर पर निर्भर करती है तथा हानि फलन सममित होता है। हानि अत्यनुमान α>α की स्थिति में होता है और अल्पानुमान α<α की स्थिति में होता है।

Machine tabulations
मशीन सारणीयन
मशीनों द्वारा सारणीयन की प्रक्रिया। कई बार यह आँकड़ा—कार्डों को पंच करके पूरी की जाती है।
जनसंख्या संबंधी आँकड़े कई बार ऐसे प्रलेखों से उद्घृत किये जाते हैं जो मुख्यतः इस प्रयोजन से तैयार नहीं किये होते। इसके लिए बुनियादी प्रलेखों पहले कूट संकेतों या संख्याओं का प्रयोग किया जाता है। फिर एक कूट योजना के अंतर्गत इनको कुछ शीर्षों के अंतर्गत कुँजी या बटन दबाकर वर्गीकृत किया जाता है।
मशीन द्वारा सारणियाँ तैयार करने की पद्धति निम्नलिखित हैं:— (1) छिद्रण या पंचिग— इस प्रक्रम में छिद्रित पत्रक पर सूचना को अंतरित किया जाता है, (2) पड़ताल या सत्यापन— इस प्रक्रम में पंच की गई सूचना की परिशुद्धता की जाँच की जाती है, (3) छँटाई या शाटन— इस प्रक्रम में एक निर्धारित क्रम से कार्डों की छंटाई की जाती है तथा (4) सारणीयन— इस प्रक्रम में कार्डों की गिनती की जाती है और कुछ वर्गों में बाँटकर उनका जोड़ लगाया जाता है।
उपर्युक्त कार्यों के लिए जोड़ करने वाली मशीनों, परिकलन मशीनों, गुणा करने वाली मशीनों, डेस्क मशीनों और कम्प्यूटरों आदि का बहुधा प्रयोग किया जाता है।

Magnificent dynamics
राजसी गतिकी
संस्थापक अर्थशास्त्रीय सिद्धांतों की प्रणाली को विलियम ज∘ बाऊमल द्वारा गया नाम।
इस प्रणाली का नामकरण क्लासिकीय अर्थशास्त्रियों द्वारा अपनायी जाने वाली पद्धति के कारण किया गया है। इन अर्थशास्त्रियों ने व्यापक सामान्य नियमों के आधार पर सरल निष्कर्षों के रूप में अर्थशास्त्र के जो नियम प्रतिपादित किए हैं राजसी गतिकी के अंतर्गत उनका अध्ययन किया जाता है।
इसमें सम्मिलित विषयों का विश्लेषण सम्पूर्ण अर्थव्यवस्था के दीर्घ-कालीन विश्लेषण से भिन्न होता है।
राजसी गतिकी का प्रक्रम या अनुक्रमी विश्लेषण से अन्तर उनकी क्रिया पद्धतियों के कारण किया जाता है।
राजसी गतिकी में निगमन विश्लेषण विधियों द्वारा सामान्यीकृत आर्थिक निष्कर्षों को ज्ञात करते हैं जबकि प्रक्रम विश्लेषण में आगमन विधियों (गणितीय नियमों, पुनरूक्ति, सांखिकीय विश्लेषण) का उपयोग किया जाता है।

Maintained hypothesis
सुस्थापित परिकल्पना
प्रारंभिक ज्ञान पर आधारित सांख्यिकी निष्कर्षों या कथनों का समूह या मॉडल सुस्थापित संकल्पना के नाम से जाना जाता है।
सुस्थापित संकल्पना विश्लेषण का पहला चरण है। इसे प्रायः सत्य माना जाता है तथा सांख्यिकीय निष्कर्ष निकालने की प्रक्रिया के दौरान इस पर किसी किस्म का संदेह नहीं व्यक्त किया जाता है।
विश्लेषण के दूसरे चरण में प्रेक्षणों के आधार पर प्रायिकता सिद्धांत की सहायता से इसके बारे में अन्य निष्कर्ष निकाले जाते हैं।
यदि प्रायिकता सिद्धांत का प्रयोग किया जाता है तो सुस्थापित परिकल्पना के साथ-साथ कम से कम यह स्पष्ट करना चाहिए कि अन्य प्रेक्षण यादृष्छिक विधि से चुने गए हैं।

Malthusian population theory
माल्थस का जनसंख्या सिद्धांत
माल्थस का जनसंख्या सिद्धांत अपने जन्मदाता थॉमस माल्थस (1766-1834) द्वारा प्रतिपादित किया गया था।
इसके अनुसार “मानव जनसंख्या पर यदि कोई रोक न लगाई जाये तो वह गुणोत्तर श्रेणी में बढ़ती है। जबकि जीवन निर्वाह के साधन विशेषतः खाद्यान्न का उत्पादन समांतर श्रेणी के अनुसार बढ़ता है।”
अतः जनसंख्या की तुलना में जीवन निर्वाह के साधनों की कमी होती जाती है और उनपर जनसंख्या का दबाव बढ़ता जाता है।
जनसंख्या के इस दबाव को रोकने के लिए आवश्यकता इस बात की है कि जनसंख्या को निर्बाध गति से बढ़ने न दिया जाये और उसके लिए नियंत्रण के उपाय काम में लाये जायें।
यदि ऐसा नहीं किया जाता तो स्वतः प्राकृतिक शक्तियाँ— जैसे अकाल, बाढ़ या युद्धों के माध्यम से, जनसंख्या तथा खाद्यान्न में संतुलन स्थापित कर देतीं हैं।


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