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Paribhasha Kosh (Arthmiti, Janankiki, Ganitiya Arthshastra Aur Aarthik Sankhyiki) (English-Hindi)
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Fixed point theorem
स्थिर बिन्दु प्रमेय
सामान्य संतुलन मॉडलों के संदर्भ में मॉडल की पूर्वधारणा को संतुष्ट करने वाले हल के अस्तित्व के बारे में आश्वस्त होने के लिए स्थिर बिन्दु प्रमेय का सहारा लिया जाता है। हल के अस्तित्व के लिए मॉडल के समीकरणों का संगत होना पर्याप्त शर्त है, आवश्यक नहीं।
ये प्रमेय कई प्रकार के होते हैं।
बराबर के स्थिर बिन्दु प्रमेय के अनुसार किसी बिन्दु परिसीमित उत्तल सेट के सतत संरूपण में एक स्थिर बिन्दु अवश्य होगा यथा F(x) फलन के सेट में एक बिन्दु x का अस्तित्व है जिसके लिए संरूपण को निम्न प्रकार से परिभाषित किया जा सकता है:— x=F(x)
इस प्रकार कम से कम एक बिन्दु स्वयं पर संरूपित हो जाता है और हम एक स्थिर बिन्दु की प्राप्ति के प्रति आश्वस्त हो जाते हैं।
रेखाचित्र में फलन F(x) का संरूपण दिखाया गया है। यह संरूपण अंतराल 0≤x≤1 के लिए परिभाषित है तथा यह बन्द परिसीमित तथा उत्तल सेट है।
वास्तविक बिन्दुओं का यह सेट सरल रेखा से प्रदर्शित किया जाता है। अतः यह संरूपण सतत् भी है। इसमें कम से कम एक बिन्दु ऐसा अवश्य होगा जहाँ फलन F(x) का ग्राफ मूल बिन्दु से 45° वाली सरल रेखा को काटेगा। नीचे के चित्र में ऐसा बिन्दु A है तथा इसके लिए (DIAGRAM) x=F(x) सत्य है। अतः A यहाँ एक स्थिर बिन्दु है।

Flow
प्रवाह
कुछ मात्राएं ऐसी होती हैं जो न्यूनाधिक समय में लगातार घटती-बढ़ती रहती हैं। इनका स्तर किसी काल विशेष जैसे प्रति सप्ताह अथवा प्रति मास के अनुसार मापा जाता है। इन मात्राओं को हम प्रवाह के रूप में व्यक्त करते हैं। उदाहरणार्थ, निवेश, आगत तथा निर्गत, आय, जन्म और मृत्यु दरें आदि।
इनके मुकाबले में हम कुछ मात्राओं को स्टॉक के रूप में मापते हैं जैसे किसी देश के स्वर्ण आरक्षण, परिचालित बैंक नोटों की संख्या अथवा फर्म के पूँजीगत साधन आदि।
प्रवाह संकल्पना में काल दिशा का विशेष महत्व होता है। उदाहरण के रूप में किसी व्यक्ति की आय को प्रवाह और उसके धन को स्टॉक माना जाता है।

Flow concept
प्रवाह संकल्पना
किसी चर के मान या परिमाण में किसी दी हुई अवधि (period of time span) के अन्तर्गत परिवर्तन।
इसमें परिवर्तन दर की संकल्पना निहित है।
तुल∘ दे∘ stock concept

Foetal death
भ्रूण-मृत्यु
गर्भस्थ शिशु की माँ के पेट में मृत्यु को भ्रूण मृत्यु कहते हैं।
इस दशा में बच्चों में गर्भावस्था में ही जीवन के चिन्ह समाप्त हो जाते हैं और प्रसव के समय मृत शिशु ही जन्म लेता है।
इसमें गर्भस्राव, गर्भपात और मृत प्रसव तीनों सम्मिलित होते हैं।

Forecast
पूर्वानुमान
पूर्वानुमान का तात्पर्य किसी घटना अथवा व्यवहार के बारे में कोई ऐसा कथन करना है जिसका अभी तक कोई प्रेक्षण न किया गया हो।
इसमें यह अनुमान लगाते हैं कि भविष्य में स्वतंत्र चरों का मान बदलने पर आश्रित चर का क्या परिमाण होगा।
इसके मुकाबले आकलन में हम केवल किसी वर्तमान चर की भावी मात्रा ही आँकते हैं।
इस प्रकार के कथन प्रायः मात्रात्मक समीकरणों, असमिकाओं, बिन्दु अनुमान तथा अन्तराल अनुमान के रूप में किये जाते हैं। इनमें संख्याओं और गुणांकों का स्पष्टतः उल्लेख किया जाता है।

Frequency curve
बारंबारता वक्र
बारम्बारता बहुभुज के बिन्दुओं को मिलाने के लिए सरल रेखाओं के बजाय यदि एक निष्कोण वक्र हाथ से खींच दिया जाये तो जो चित्र बनता हैं उसे बारंबारता वक्र कहा जाता है।
चित्र 13 (DIAGRAM)

Frequency distribution
बारंबारता बंटन
मात्रात्मक वर्गीकरण की ऐसी विधि जिसमें प्रेक्षण तथा उनकी बारंबारता से निर्मित व्यवस्था को दिखाया जाता है।
ये प्रेक्षण प्रत्यक्ष माँग अथवा अन्तराल संख्याओं के रूप में हो सकते हैं। जितनी बार कोई प्रेक्षण या वर्ग अन्तराल घटित होता है उसे बारंबारता कहा जाता है।
इस बंटन को किसी फलन अथवा सारणी के रूप में दिखाया जाता है। ऐसे बंटन के मानों से आरेख भी खींचे जा सकते हैं तथा इनको बहुभुज के रूप में भी चित्रित किया जाता है।

Frequency polygon
बारंबारता बहुभुज
बारंबारता बहुभुज के आँकड़ों को प्रस्तुत करने की एक आलेखनीय विधि जिसकी रचना निम्न प्रकार से की जाती है:-
(1) वर्ग अन्तरालों के मध्य बिन्दुओं को क्षैतिज अक्ष पर अंकित किया जाता है। (2) संगत बारंबारताओं को कोटियाँ मानकर ऊध्वधिर मापनी पर आलेखित किया जाता है। (3) आलेखित बिन्दुओं को सरल रेखा द्वारा मिला दिया जाता है।
बारंबारता बहुभुज का एक चित्र नीचे दिया जाता है:— चित्र (DIAGRAM)

Frictional unemployment
घर्षी बेरोज़गारी
ऐसी बेरोज़गारी जो व्यक्तियों के श्रम शक्ति या श्रमिक बल में प्रवेश करने या बाहर जाने के कारण पैदा होती है।
यह व्यक्तिगत समंजन या पुनर्समंजन के प्रयास की द्तयोक होती है तथा इसका औद्योगिकी परिवर्तनों या व्यवसाय चक्र के उतार-चढ़ाव अथवा उच्चावचन से कोई संबंध नही होता।
तुल∘ दे∘ structural unemployment

Full information estimation
पूर्ण सूचना आकलन
ऐसी विधि जिसमें अनेक प्रारंभिक प्रतिबंधों वाले मॉडल के प्राचलों के मान आकलित करने के लिए लघुगणकीय प्रसंभावना फलन को अधिकतम करते हैं, पूर्ण सूचना आकलन विधि कहलाती है।
यदि केवल कुछ प्रतिबंध ही काम में लाये जाएं तो इस विधि को सीमित सूचना आकलन विधि कहते हैं।
पूर्ण सूचना आकलन, सीमित सूचना आकलन से अधिक दक्ष होते हैं।


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