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Paribhasha Kosh (Arthmiti, Janankiki, Ganitiya Arthshastra Aur Aarthik Sankhyiki) (English-Hindi)
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Vital registration
जन्म-मरण पंजीकरण
दे∘ — (Vital rates)

Vital statistics
जन्म-मरण संबंधी आँकड़े
दे∘ — (Vital rates)

Ven Neumann model
वॉन न्यूमैन मॉडल
वॉन न्यूमैन द्वारा बहुक्षेत्रक संवृद्धि के लिए तैयार किया गया मॉडल।
यह मॉडल विस्तार सिद्धांत के विश्लेषण के लिए मानक उपकरण माना जाता है।
इस मॉडल की शुरूआत अनेक निर्गतों और उत्पादन प्रक्रियाओं से होती है। n क्षेत्रकों में से प्रत्येक में पिछली अवधि में अपने द्वारा तथा दूसरे क्षेत्रकों द्वारा तैयार की गई निर्गतों का आगत के रूप में प्रयोग किया जाता है।
इस मॉडल का उद्देश्य अर्थव्यवस्था में स्थिर दर पर संतुलित संवृद्धि की संभावनाओं का पता लगाना होता है। इसकी रूप-रेखा यों दी जा सकती है:— मानलीजिए— i- अर्थव्यवस्था में चलने वाली किसी प्रक्रिया के स्तर की इकाई है तथा यह वस्तु j की aij मात्रा का आगत के रूप में प्रयोग करती है। इसकी j वस्तु की अपनी उत्पादन की मात्रा या निर्गत bij के बराबर है और यदि अर्थव्यवस्था द्वारा प्रक्रिया i की xi इकाईयों का प्रयोग किया जाता है तब इस मॉडल के अनुसार सभी प्रक्रियाओं द्वारा वस्तु j का आगत के रूप में कुल प्रयोग यों होगा:— ∑_(i=1)^m▒〖x^i a_ij 〗 और कुल निर्यात यों होगा ∑_(i=1)^m▒〖x_i b_ij 〗

Von Neumauns ratio
वॉन न्यूमैन अनुपात
इस अनुपात में किसी श्रेणी के प्रसरण और उसके वर्ग माध्य के उत्तरोत्तर अन्तर को एक प्रतिदर्शज के रूप में दिया जाता है। इस अनुपात की सहायता से किसी क्रमित श्रेणी में किए जाने वाले निरन्तर प्रेक्षणों की स्वतंत्रता की परख की जाती है जबकि ऐसी श्रेणी का बंटन सामान्य होता है।
इस अनुपात का प्रयोग सबसे पहले वॉन न्यूमैन (1944) द्वारा किया गया था। बड़े प्रतिदर्शजों में जिन्हें यादृच्छिक श्रेणियों के बंटन में से लिया जाता है, यह अनुपात उस स्थिति में सामान्य माना जाता है जब इसका माध्य 2 होता है और प्रसरण 4 (n—2) /(n2—1) होता है तथा जब प्रेक्षणों की संख्या n होती है।


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