उपभोक्ता को विभिन्न वस्तुओं की अलग अलग मात्राओं से होने वाली उपयोगिता को दर्शाने वाला फलन ।
गणितीय पदों में इसे दो वस्तुओं के संदर्भ में इस प्रकार प्रगट किया जाता है:—
U=f(q_1,q_2 )
यहाँ पर q_1 और q_2 किन्हीं दो वस्तुओं के उपयोग की मात्रा के द्योतक हैं।
उपर्युक्त फलन में यह पूर्वधारणा की गई है कि यह फलन सतत है। इसके प्रथम कोटि तथा द्वितीय कोटि के आंशिक अवकलन निकाले जा सकते हैं। यह फलन अद्वितीय नहीं है तथा इस फलन को किसी निर्दिष्ट समय के लिए ही उपभोक्ता के व्यवहार का द्योतिक माना जा सकता है। भिन्न-भिन्न समयों पर उसकी तुष्टि का स्तर तथा व्यवहार अलग प्रकार का होगा। इस फलन में उपभोक्ता के व्यय को एक काल से दूसरे काल में अंतरित करने की कोई संभावना नहीं रहती।
Utility index
उपयोगिता सूचकांक
एक दिया हुआ उपयोगिता फलन U (x_1,x_2 ) जो बजट-तल के प्रत्येक बिन्दु पर परिभाषित होता है, उपयोगिता सूचकांक कहलाता है।
यह सूचकांक फलन निम्न स्थिति में एकदिश रूपांतर होता है:—
U(x_1,x_2 ) U(y_1,y_2 )
शर्त यह है कि उपभोक्ता दूसरे वस्तु संयोग (x_2,y_2 ) को पहले वस्तु-संयोग (x_1,y_2 ) की तुलना में वरीयता दे।
यह सूचकांक तभी बनाया जा सकता है जब उपभोक्ता का व्यवहार निम्न पाँच स्वयंसिद्धियों के अनुसार हो:—
(1) पूर्ण क्रमीकरण स्वयंसिद्धि (Complete ordering axiom)
(2) सातत्य की स्वयंसिद्धि (Continuity axiom)
(3) स्वातंत्रय की स्वयंसिद्धि (Independence axiom)
(4) असमान प्रायिकता की स्वयंसिद्धि (Unequal probability axiom)
(5) सम्मिश्रता की स्वयंसिद्धि (Axiom of complexity)