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Paribhasha Kosh (Arthmiti, Janankiki, Ganitiya Arthshastra Aur Aarthik Sankhyiki) (English-Hindi)
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Total variation
संपूर्ण विचरण
महामाध्य से सभी वर्गीकृत विचलनों का जोड़ संपूर्ण विचरण कहलाता हैं।
यह〖Ns〗^2 के बराबर होता है जहाँ पर s मानक विचलन का द्योतक है। इसका सूत्र इस प्रकार है: ∑_1^N〖(x-x̅)〗^2
संपूर्ण विचरण स्तंभ माध्यों के बीच तथा उनके अन्दर के विचरण के जोड़ के बराबर होता है।

Transformation curve (production possibility curve)
रूपांतरण वक्र (उत्पादन संभावना वक्र)
किन्हीं दो आगतों के बीच तथा किसी एक आगत और निर्गत के बीच अनुपातों का विश्लेषण रूपांतरण वक्र की विधि द्वारा किय़ा जाता हैं।
इस विधि में एक निर्गत को क्षैतिज अक्ष पर दिखाया जाता है। जब सभी आगत और निर्गत ज्ञात होते हैं तब हम इस वक्र को नीचे के चित्र के अनुसार दिखा सकते हैं।
रूपांतरण वक्र का दूसरा नाम उत्पादन संभावना वक्र है। (DIAGRAM)

Transformation of variable
चर रूपांतरण
एक चर को किसी गणितीय समीकरण से जोड़कर दूसरे चर के रूप में बदलना।
यह इस प्रयोजन से किया जाता है कि किसी चर के बंटन के फलन को पूर्णतः अथवा निकटतम रूप से किसी ऐसे दूसरे विचर के रूप और गुणों के बंटन के रूप में दिखाना होता है जिसका फलन हमें ज्ञात होता है। इस तरह यह अज्ञात विचर को ज्ञात फलन के रूप में दिखाने की एक गणितीय विधि है।

Transverse of matrix
आव्यूह परिवर्त
यदि किसी आव्यूह (मैट्रिक्स) की पंक्तियों और स्तंभों को आपस में अदल-बदलकर लिखा जाता है, तो इस प्रकार से जो नया आव्यूह बनता है वह मूल आव्यूह का परिवर्त कहलाता है।
इसमें उतने ही अवयव होते हैं जितने कि मूल में जैसे नीचे मैट्रिक्स x का परिवर्त x' है x=⟦■(11&0&8@-5&2&-7)⟧ x'=■(11&-5@0&2@8&-7)⟧⟧
एक सममित वर्ग-आव्यूह ही अपने परिवर्त का सममित होता है।

Triangular matrix
त्रिकोणीय आव्यूह
निम्न प्रकार का आव्यूह ⟦■(a_11&0&0@a_21&a_22&0@a_31&a_32&a_33 )⟧
जब आव्यूह का रूप इस प्रकार होता है:— a 0 0 0 0 b c 0 0 0 - - - - - f g - - n
तब इसे अर्ध-त्रिकोणीय (Quasi-triangular) आव्यूह कहा जाता है।
तुल∘ दे∘ (matrix)

Triangular reduction
त्रिकोणीय लघुकरण
यदि A, m कोटि का वर्ग-आव्यूह हो और इसके अन्दर m x m आकार का एक ऐसा व्युत्क्रमणीय आव्यूह हो जिसमें BA एक त्रिकोण के आकार का बन जाए अर्थात् ऐसे आव्यूह में विकर्ण से नीचे के सभी अवयव शून्य हों तब इस प्रकार के समानयन को त्रिकोणीय लघुकरण कहा जाता है।

Triagnometric function
त्रिकोणमितीय फलन
जब चरों को त्रिकोणमितीय रूपों में रखकर इनका आपसी संबंध प्रदर्शित करते हैं तब फलन को त्रिकोणमितीय फलन कहते है।
साधारणतया त्रिकोणमितीय फलन में आश्रित चर अपने मूल रूप में ही रहता है जैसे:—
y = a Sin (bx+c)

Turnpike theorem
टर्नपाइक प्रमेय / प्रतिवर्त प्रमेय
पूँजी संचयन से संबंधित स्थायी संवृद्धि का सिद्धांत।
इस सिद्धांत का सर्वप्रथम प्रतिपादन डार्फमैन (Dorfmen) सेमुअलसन (Samuelson) और सोलो (Solow) ने 'रैखिक प्रोग्रमन और आर्थिक विश्लेषण' के अन्तर्गत किया है। इसका वान न्यूमैन (Von Neumann) द्वारा अधिकतम संवृद्धि के संदर्भ में और आगे विकास किया गया है।
इस प्रमेय के अनुसार यदि हम दीर्घावधिक संवृद्धि के लिए आयोजन कर रहे हों तब भले ही जहाँ कहीं से भी प्रारंभ करे और जहाँ तक मर्जी जाना चाहें, हमें इस प्रक्रम के दौरान, ऐसी मध्यवर्ती अवस्थाओं में से गुजरना पड़ेगा जो एक ऐसी टर्नपाइक (नाका या प्रतिवर्त बिन्दु) की तरह होंगी जो सामान्तया लघुमार्गों या सड़कों द्वारा घिरा होगा।
इस मार्ग पर हमें दो, बिन्दुओं के बीच तीव्रगति वाले पथ का अनुसरण करना होगा। यदि ये दोनों बिन्दु एक दूसरे के काफ़ी नजदीक हों चाहे ये नाके या प्रतिवर्त बिंदु से कितनी दूर क्यों न हो तब हमें इन दोनों के बीच वह रास्ता चुनना पड़ेगा जो चाहे प्रतिवर्त बिदु को न भी छूता हो किन्तु तीव्रतम गति से पूरा किया जा सकता हो। भले यह रास्ता लंबा हो परंतु अस्थायी रूप से यहीं इष्टतम संवृद्धि का मार्ग होगा।

Two stage least square estimation
द्विस्तरीय न्यूनतम वर्ग आकलन
द्विस्तरीय न्यूनतम वर्ग आकलन विधि सीमित सूचना पद्धति का एक विकल्प है। इसकी सहायता से दो या अधिक संयुक्त आश्रित चरों वाले अधिचिह्नित समीकरणों का आकलन किया जाता है। इसके अन्तर्गत निम्नलिखित क्रियाएं की जाती हैं:— (क) आजकल समींकरण में संयुक्त रूप से आश्रित चरों में से पहले हम एक का वरण करते हैं जिसे दुसरे स्तर पर आश्रित चर माना जाता है (ख) लघुकृत समीकरण के न्युनतम वर्ग की गणना की जाती है, जिसमें पहले चुने गए चार को छोड़कर शेष संयुक्त आश्रित चरों को शामिल किया जाता है। (इसे द्विस्तरीय प्रक्रिया का प्रथम स्तर कहा जाता है) (ग) इन संयुक्त रूप से आश्रित शेष चरों के प्रेक्ष्य आँकड़ों के स्थान पर इनके आकलित मानों को रखना तथा (घ) चुने हुए आश्रित चरों के समुच्चय के लिए न्यूनतम वर्ग समाश्रयण का कलन करना। (इसे आकलन का दूसरा स्तर कहा जाता है)। इस विधि का आर्थिक प्राचलों में बहुधा प्रयोग किया जाता है।
यह विधि नीदरलैंड के प्रसिद्ध अर्थमितिज्ञ प्रो∘ हेनरी थायल द्वारा प्रतिपादित की गई है। इसकी सहायता से दो या अधिक संयुक्त आश्रित चरों वाले युगपत् समीकरणों के अति अभिज्ञात निकाय का आकलन किया जाता है। इसके अन्तर्गत निम्नलिखित क्रियाएं की जाती हैं:— (1) प्रथम स्तर में वर्णित अंतर्जात चरों को उनके लघुकृत रूप में न्यूनतम वर्ग विधि से आकलित करते हैं जिसे दूसरे स्तर पर आश्रित चर माना जाता है। इसके बाद समीकरण के दाहिनी ओर सम्मिलित संयुक्त रूप से आश्रित चर अथवा चरों के सापेक्ष लघुकृत समीकरण से इस अथवा इन आश्रित चरों के लिए न्यूनतम वर्ग आकलन निकाला जाता है तथा (2) दूसरे स्तर में संरचनात्मक समीकरण में दाहिनी ओर आये आश्रित चरों के आकलक का प्रयेग करके उसमें दिए बांईं ओर के प्राचलों को न्यूनतम वर्ग विधि द्वारा आकलित किया जाता है।
दोनों स्तरों पर अन्तर्जात चरों को उनके लघुकृत रूप में न्यूनतम वर्ग विधि से निम्नलिखित ढंग से आकलित किया जाता है: Y+xβ=a Y=xπ+r Y=xπ Y_1=ϒ_2 γ_1+x_1 〖βγ〗_1 (log⁡〖Y+〗ϒ γ_2)
दूसरे स्तर पर दाईं ओर आए अन्तर्जात चरों के प्रेषित मानों को उनके लघुकृत आकलित मानों द्वारा पुनः स्थापित करते हैं।
इस विधि का मुख्य लाभ यह है कि यदि युगपत समीकरण को सीधे न्यूनतम वर्ग विधि द्वारा आकलित किया जाए तो उसके प्राचलों के आकलक असंगत होते हैं जबकि द्विस्तरीय न्यूनतम वर्ग आकलक संगत होता है इस प्रकार द्विस्तरीय न्यूनतम वर्ग विधि एक प्रकार से बहुत से अन्तर्विरोधी आकलन हेतु समीकरणों के औसतीकरण की विधि है। यह अन्तर्विरोधि समीकरणों अतिअभिज्ञात निकाय में तब उदय होते हैं जब सभी पूर्वनिर्धारित चरों को साधन चर रूप में प्रयोग कर साधनभूत चर विधि का प्रयोग किया गया हो।

Two way matc
दुतऱफा सुमेल
यह एक ऐसी सुमेलन क्रिया है जो तब तक जारी रखी जाती है जब तक कि दोहरी अभिलेख विधि के सभी अभिलेखों का सुमेलन दोनों तरफ से पूरा नहीं कर लिया जाता।


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