अपने अथवा किसी अन्य व्यक्ति के कार्य के परिणामस्वरूप किसी पक्ष को होने वाली हानि की भरपाई कर देने का प्रतिज्ञाकर्ता का वायदा 'क्षतिपूर्ति संविदा' है।
Contractual capacity
संविदा-क्षमता
करार कर सकते की क़ानूनी सामर्थ्य। भारतीय संविदा अधिनियम के अनुसार हर वह व्यक्ति करार कर सकता है जो वयस्क है, जिसका दिमाग ठीक है और जो अपने ऊपर लागू होने वाले किसी क़ानून के अंतर्गत करार करने के लिए अयोग्य नहीं है।
Contra entry
प्रति प्रविष्टि
किसी लेखे या खाते में एक ओर प्रविष्टि कोई ऐसी मद जो उसी लेखे या खाते की दूसरी ओर प्रविष्ट एक या अधिक मदों को अंशतः या पूर्णतः निष्प्रभावित करती हो।
Contributory
अंशदायी
भारतीय कंपनी अधिनियम की धारा 428 के अनुसार ऐसा प्रत्येक व्यक्ति 'अंशदायी' है जिसे कंपनी के परिसमापन की सूरत में उसकी परिसंपत्तियों में अपना हिस्सा देने को कहा जा सकता है। यह पूर्णप्रदत्त शेयरों का स्वामी भी हो सकता है या ऐसा कोई अन्य व्यक्ति हो सकता है जिसे 'अंशदायी' बताया जा रहा हो।
Controlled economy
नियंत्रित अर्थव्यवस्था
सरकार द्वारा पूर्णरूपेण नियंत्रित अर्थव्यावस्था। इसमें यह जरूरी नहीं है कि प्रत्येक आर्थिक कार्यकलाप को सरकार अपने ही हाथ में ले ले बल्कि वह अनेक प्रकार के सरकारी नियंत्रणों के ज़रिये उत्पादन, विदेश व्यापार, श्रमिकों के नियोजन आदि पर अंकुश रखती है ताकि अभीष्ट लक्ष्य प्राप्त किए जा सके।
Controlled price
नियंत्रित क़ीमत
सरकार द्वारा निश्चित की गई किसी वस्तु की क़ीमत। ऐसा प्रायः उपभोक्ताओं के आम इस्तेमाल की चीजों या लोहा, सीमेन्ट आदि महत्वपूर्ण वस्तुओं के मामले में किया जाता है।
Convertibility
परिवर्तनीयता, विनिमेयता
अ - किसी देश की मुद्रा की अन्य देशों की मुद्राओं में सरलतापूर्वक बदले जा सकने की क्षमता।
आ - (कंपनी वित्त) वित्त-प्रदायकों द्वारा लगाई गई एक शर्त जिसके अनुसार भविष्य में प्रदत्त ऋणों अथवा ऋणत्रों को कंपनी के शेयरों में बदला जा सकता है।
विशेषीकृत वित्त संस्थाओं के ऋण-क़रारों में यह शर्त एक धारा के रूप में समाविष्ट की जाती है।
Convertible debenture
परिवर्तनीय डिबेंचर
ऐसा डिबेंचर जिसे उसका धारक एक अवधि के पश्चात् शेयर में बदलवा सकता है।
Convertible insurance
परिवर्तनीय बीमा
ऐसा बीमा जिसमें बीमा कराने वाला व्यक्ति उसे किसी अन्य प्रकार के बीमे में परिवर्तित करा सकता है।
Co-partnership
सहसाझेदारी, सहभागिता
किसी प्रतिष्ठान के कर्मचारियों का उसकी शेयर-पूँजी में आंशिक स्वामित्व। कर्मचारियों को शेयर देने का उद्देश्य यह है कि उन्हें प्रतिष्ठान के नीति-निर्धारण एवं उसके संचालन में भाग लेने का अवसर मिल सके।